March 27, 2017

ताज़ा खबर

 

चौपालः जहर के विरुद्ध

देश की व्यवस्था चलाने की जिनकी जिम्मेदारी है, वे लोकहितकारी सुनियोजित प्रायोजनों पर कम और टोटकेबाजी पर ज्यादा ध्यान लगाते हैं।

Author October 7, 2016 02:45 am

देश की व्यवस्था चलाने की जिनकी जिम्मेदारी है, वे लोकहितकारी सुनियोजित प्रायोजनों पर कम और टोटकेबाजी पर ज्यादा ध्यान लगाते हैं। काम को नहीं, उसके प्रचार को ज्यादा महत्त्व देते हैं। वे पुरुषार्थ को नहीं भक्तिभाव को ज्यादा महत्त्व देते हैं। आज पूरे देश में काम से ज्यादा भक्तिभाव सिर चढ़ कर बोल रहा है। देशहित से ज्यादा उन्माद का पारा सिरे चढ़ाया जा रहा है ताकि आपके काम पर कोई सवाल न उठाये। सर्जिकल स्ट्राइक मकसद से आगे राजनीति का हथियार बना दी गई है। युद्धक बोलों से कश्मीर की असल समस्या को भुलाया जा रहा है। गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी, महंगाई और कालाधन पर बात न हो, इसलिए देशभक्ति की ताल पर दिल बहलाये जा रहे हैं। एक तरफ युद्ध की तैयारी के लिए खड़ी फसल के बीच गांव खाली करवाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ राजस्थान की मुख्यमंत्री दुश्मन के विनाश के लिए देवी उपासना और यज्ञ का आह्वान कर रही हैं।

वहीं दो अक्तूबर को जब पूरा देश गांधी जयंती मनाते हुए गांधी के आदर्श और उनके जीवनमूल्यों पर चर्चा कर रहा था, हिंदू सांप्रदायिक शक्तियां, जो कहीं न कहीं केंद्र की मोदी सरकार के क्रियाकलापों और उनकी पार्टी के प्रवक्ताओं के वक्तव्यों से आक्सीजन ग्रहण करती हैं, महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की मूर्ति का अनावरण कर रही थीं। मीडिया में आई खबरों के अनुसार मेरठ में हिंदू महासभा से जुड़े लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे की मूर्ति का अनावरण किया। लखनऊ से भी ऐसी खबरें आर्इं। वैसे भी नरेंद्र मोदी गांधी जयंती को स्वच्छ भारत दिवस के रूप में बदल चुके हैं। जहां गांधी के आदर्श और उनके जीवन मूल्यों की चर्चा न करके सफाई अभियान तक उन्हें सीमित कर दिया गया है। लेकिन यह भी प्रचार से ज्यादा जुड़ा है और सरोकार से कम। जो व्यवस्था अपनाई जा रही है, उससे तो पहले जो सफाई होती थी, वह भी गई। यह अभियान महज रस्मी सफाई और फोटों खिंचवाई तक सिमट कर रहा गया है। लेकिन जो शक्तियां एक सोचे-समझे एजेंडे को सामने रख कर सांप्रदायिकता के जरिये देशवासियों के मन-मस्तिष्क में जहर घोल रही हंै, उसकी सफाई कैसे होगी, यह सोचकर ही देश का आम जनमानस सशंकित और डरा हुआ है। मेरठ जैसी कार्रवाइयां न केवल गांधी विरोधी, बल्कि मानवता विरोधी भी हैं। वे समाज को बांटने वाले एजेंडे को सामने रख कर की जा रही हैं। इनकी जितनी कड़ी भर्त्सना की जाए कम है। देश संविधान के अनुसार चलना चाहिए न कि किसी ऐसी विशेष विचारधारा से जो कि देशवासियों के बीच सांप्रदायिक विभाजन करती हो। ऐसे संविधान विरोधी तत्त्वों पर तत्काल कार्रवाई की जाए और देश में सद्भाव व सौहार्द को हर कीमत पर कायम रखा जाए। इसी में मानवता का विकास सभंव है।
’रामचंद्र शर्मा, तरुछाया नगर, जयपुर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 7, 2016 2:45 am

  1. No Comments.

सबरंग