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अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आजादी पर हाल में जारी अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में धर्म परिवर्तन संबंधी हत्याएं, मुसलमानों और ईसाइयों पर अत्याचार और दंगे जैसी घटनाएं हुई हैं और भारतीय प्रशासन और पुलिस ने भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव पूर्ण बयान दिए हैं।
Author October 16, 2015 10:21 am

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आजादी पर हाल में जारी अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में धर्म परिवर्तन संबंधी हत्याएं, मुसलमानों और ईसाइयों पर अत्याचार और दंगे जैसी घटनाएं हुई हैं और भारतीय प्रशासन और पुलिस ने भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव पूर्ण बयान दिए हैं। इस रिपोर्ट में 2002 के दंगों से लेकर तोगड़िया की मुस्लिमों को हिंदू बहुल इलाके में घर न खरीदने की हिदायत और ‘पीके’ फिल्म के विरोध के साथ ही मध्यप्रदेश में धर्म परिवर्तन की घटनाओं और गिरफ्तारियों का उल्लेख है।

अमेरिका हमेशा दूसरे देशों का अभिभावक बनने की कोशिश करता रहा है पर अपने यहां डेढ़ सौ साल से चले आ रहे अभियान के बाद भी अश्वेतों के साथ भेदभाव और हमलों को नहीं रोक पाया है। अमेरिका की आबादी लगभग 32 करोड़ है। इसमें लगभग 14 प्रतिशत आबादी अश्वेतों की है। इनमें से 2013 तक 27.2 प्रतिशत की गरीबी दर के साथ ये लोग आमतौर पर गरीब परिवेश से हैं।

देश में मौजूद 83.7 प्रतिशत अश्वेतों में से सिर्फ 25 प्रतिशत के पास 2013 में हाईस्कूल डिप्लोमा था। इस समूह के सिर्फ 19.3 प्रतिशत लोगों के पास स्नातक डिग्री थी। 15 से 19 वर्ष के अश्वेत युवक प्रति लाख 31.17 की दर से मारे गए, जबकि श्वेत युवकों में यह दर 1.47 प्रतिशत थी। अश्वेत युवकों और पुरुषों को मारने की घटनाओं में अधिकतर श्वेत पुलिसकर्मी ही शामिल रहे हैं।

1619 से लेकर 1865 में अमेरिका में कुछ अफ्रीकी बंदी हुआ करते थे और आज उन्हीं की संतानों के रूप में अफ्रीकी अमेरिकी अश्वेत कहलाते हैं और उन्हें युद्धबंदी या गुलाम की तरह रखा जाता था। आज स्थिति अलग है। अब अमेरिका में एक अश्वेत अमेरिकी अफ्रीकी राष्ट्रपति है। पूरे विश्व में अमेरिका का डंका बजता है पर अश्वेतों की हालत किसी से छुपी नहीं है। अब्राहम लिंकन द्वारा किए गए अथक प्रयासों और दास-मुक्ति अभियानों के बाद भी अमेरिका में आज अश्वेत दयनीय स्थिति में जी रहे हैं तो बेहतर होगा दूसरों पर अंगुली उठाने से पहले अमेरिका अपने गिरेबान में झांक कर देखे।
’अमित साहु, शाहदरा, दिल्ली

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