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चौपाल

चौपालः कृत्रिम बुद्धिमत्ता

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) की देन स्वचालन (आॅटोमेशन) को आने वाले आर्थिक, सामाजिक परिदृश्य के अग्रदूत के रूप में देखा जा रहा है।

चौपालः गांधी के साथ

पिछले कुछ वर्षों से सोशल मीडिया पर अपने राजनीतिक विरोधियों को बदनाम करने का खेल तेजी से चल रहा है।

कुप्रथाओं के विरुद्ध

बाल विवाह के पीछे अभिभावक गरीबी और एक झंझट से मुक्ति का तर्क देते हैं। दहेज प्रथा अगर खत्म हो जाए तो निश्चय...

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ताजमहल को लेकर शुरू से अलग नजरिया रहा

दिलों की धड़कन के प्रतीक ताजमहल को इस तरह सियासत की नजरों से देखा जाएगा, ऐसा किसी ने नहीं सोचा था।

शराबबंदी का विस्तार

बिहार में शराबबंदी का काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पियक्कड़ों का स्वास्थ्य सुधरने के साथ-साथ उनके घर में आर्थिक समृद्धि भी आई है।

संघर्ष का रास्ता

भारत अपवाद रहा जिसने शुरुआत समानता के महान आदर्शों को संविधान और नीतियों में जगह देकर की। हालांकि कई बार यह व्यवहार में आम...

दोषी कौन

क्या शिक्षा संस्थानों की ऐसी दुर्गति के लिए अभिभावक भी जिम्मेदार नहीं हैं, जो अपने बच्चों को बड़े स्कूलों में पढ़ाने को न केवल...

नफरत को हवा

पाकिस्तान में रेलवे स्टेशनों और सड़क किनारे बिकने वाली किताबों या सनसनी फैलाने वाली पत्रिकाओं में छपी कहानियों में खलनायक का किरदार आमतौर पर...

बुलेट ट्रेन किसके लिए

रेलमंत्री ने कहा है कि ट्रेनों के प्रत्येक डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे जिससे ट्रेनों में सफर करने वाली सभी महिलाएं व पुरुष...

जो वादे किए गए थे उनका क्या हुआ?

नोटबंदी और जीएसटी तो रामबाण बताए जा रहे थे। फिर इनके लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था की सेहत संवरने के बजाय क्यों और...

चौपालः देव के नाम पर

बीते दिनों देवदासी जैसी अमानवीय परंपरा जारी रहने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है।

चौपालः गांव की ओर

गांधीजी ने कहा था कि भारत की आत्मा गांवों में निवास करती है, लेकिन आज बदलाव के दौर में यह परिभाषा बदलती जा रही...

सीख पर सवाल

इनसे सबंधित घटनाएं मसलन अपहरण (जेएनयू), हत्या (रेयान स्कूल), छेड़छाड़ व अत्याचार (बीएचयू) आदि सामने आ रही हैं। क्या यह अफसोस की बात...

प्रधानमंत्री अपनी सरकार की नीतियां और योजनाएं बनाने के लिए जनता के साथ राय-मशविरा करें

आम लोगों के मन की बात कहते हैं और उनके इस काम ने करोड़ों लोगों को जगाया है, प्रेरणा दी है। स्वच्छता से लेकर...

चौपाल- किसका हित

पुलिस ने लड़कों को तो दौड़ा कर पीटा ही, लड़कियों को भी नहीं बख्शा और उन्हें भी मारा-पीटा। सबसे शर्मनाक बात यह है...

बैंकों ने अपनी नीति में एक निंदनीय परिवर्तन किया है

जिस दिहाड़ी मजदूर की कमाई 300 से 400 रुपए प्रतिदिन है वह अपने रोज के नमक, तेल, सब्जी से बचे पैसों को बैंक में...

राजनीति से ऊपर

प्रश्न है कि यह कौन-सा राष्ट्रवाद है जो छात्राओं के साथ होते यौन अपराधों पर चुप्पी साधे रहता है या अपने सम्मान की लड़ाई...

देश में कितनी सुरक्षा और सहिष्णुता है

हम केवल सपनों और जुमलों में खोये रह कर जीना चाहते हैं।

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