March 24, 2017

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चौपाल

चौपालः निजता की आड़

निर्वाचन के लिए शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है, लेकिन गलत जानकारी देना प्रत्याशी की अयोग्यता का कारण बन सकता है।

चौपालः लूट की निकासी

देश में नकदी विहीन लेन-देन के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है। इसे बनाने के लिए कम से कम पंद्रह से बीस वर्ष...

चौपाल: घोषणा के खिलाफ, चिंता का विषय

आठ नवंबर 2016 को जब मोदी सरकार ने नोटबंदी की घोषणा की थी तब साफ तौर पर बताया गया था कि 500 और 1000...

चौपाल: नकल पर नकेल, बेतुके बोल

हैरान करने वाला तथ्य यह है कि पेपर लीक के मामलों में कुछ निजी कोचिंग संस्थानों का हाथ होने की बात भी सामने आई...

चौपाल: कौन खोलेगा पोल, सेहत का सवाल

आज देश में 93 फीसद अस्पताल निजी क्षेत्र के हैं, जो मोटी रकम वसूल करते हैं। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा स्टाफ की भारी...

चौपाल: रिश्तों का कत्ल, नोटबंदी के बाद

आजकल जिस तरह रिश्तों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं वह बहुत चिंताजनक है। सगे-संबंधी भी रुपयों के लिए किसी भी हद तक गिर...

चौपाल: स्वार्थ से परे, मुश्किल सफर

गांव से स्कूल-कॉलेजों में आने-जाने के लिए रोडवेज की बसों में बेटियों को कोई सुविधा सुविधा नहीं मिलती।

चौपाल: हार की सीख, नतीजों का सबक

दरअसल, हम सब सिर्फ जीतना चाहते हैं, हारना नहीं। लेकिन जीतने के लिए हारना भी जरूरी होता है। हार हमें सीखने का, और बेहतर...

चौपालः कैसी आजादी

विश्वविद्यालयों में इन दिनों आजादी की फसल उगाई जा रही है! इस फसल को खाद और पानी देने का काम हमारे आदरणीय नेतागण कर...

चौपालः दूषित राजनीति

आजकल राजनीति में भाषा के गिरते हुए स्तर का मुद्दा गरमाया हुआ है। इस गिरावट का संबंध सीधे हमारे नव उदारवादी आर्थिक तंत्र से...

चौपाल: नोटबंदी का असर, कैसी शर्त

केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन की ओर से जारी चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के आर्थिक वृद्धि दर के आंकड़े नोटबंदी से लगभग बेअसर दिखे।...

चौपाल: धनबल का चुनाव, दावे और हकीकत, गधों के साथ

चुनाव आयोग इसे उत्तर प्रदेश के अब तक के चुनावों में की गई सबसे ज्यादा जब्ती बता रहा है जबकि दो चरण का मतदान...

चौपाल: आस निराश, संवेदना की मौत

सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं लेकिन जनता कि सके हक में फैसला करेगी इसका निर्णय ग्यारह मार्च को ही हो...

चौपाल- पीड़ा का परिदृश्य, विवाद और संवाद

जेएनयू के छात्रों और अध्यापकों की पिछले एकवर्ष से आरंभ हुई संघर्ष-यात्रा इस समय अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

चौपाल: छोटा बड़ा, रंजिश का अखाड़ा, हिंसा का मानस

विचारो में अंतर होना लोकतंत्र के लिए बहुत अच्छी बात होती है, क्योंकि इससे समाज को तरह-तरह की सोच मिलती है जो समाज के...

मोर्चे पर किसान

अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा जब गांव-गांव, ढाणी-ढांणी में किसानों के बीच पहुंच कर पर्चे बांटे गए, उनकी छोटी-छोटी संभाएं की गई और...

चौपाल: संसाधनों की सुध, निकाह की शर्त

हाल ही में मौलवियों के एक बयान कि ‘जिन घरों में शौचालय नहीं हैं, उन घरों के लड़कों के निकाह हम नहीं करवाएंगे’ ने...

चौपाल: एक साथ चुनाव, जवानों का हाल

इन दिनों विधानसभा चुनाव के कारण न केवल केंद्रीय मंत्री और सांसद बल्कि विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक भी चुनावी सभाओं-रैलियों में...

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