ताज़ा खबर
 

हमारी गुलामी

अंगरेजों से आजादी के लिए न जाने कितनी ही लड़ाइयां हमने लड़ीं, अंतत: आजाद तो हुए पर एक नई गुलामी के साथ। अंगरेज तो खुलेआम कहते थे कि तुम गुलाम हो पर अब तो हम आजाद होकर भी गुलाम हैं। आज भी गरीबी चारों तरफ फैली हुई है जो हर तरह की गुलामी और शोषण […]
Author August 18, 2015 08:47 am

अंगरेजों से आजादी के लिए न जाने कितनी ही लड़ाइयां हमने लड़ीं, अंतत: आजाद तो हुए पर एक नई गुलामी के साथ। अंगरेज तो खुलेआम कहते थे कि तुम गुलाम हो पर अब तो हम आजाद होकर भी गुलाम हैं। आज भी गरीबी चारों तरफ फैली हुई है जो हर तरह की गुलामी और शोषण के लिए जमीन तैयार करती है।

विकास के तमाम दावों के बावजूद आम आदमी बदहाली के हाशिये पर पड़ा है। बेरोजगार युवा वर्ग रोजगार के लिए भटक रहा है और महंगाई का पारा तो वैसे ही गरम है। आरक्षण के चलते योग्य छात्रों को मौका नहीं मिल रहा और महिलाओं की शिक्षा तो रामभरोसे ही है।

एक तरफ अनाज सड़ रहा है तो दूसरी तरफ लोग भूखे पेट भी सो रहे हैं। गर्म कपड़ों की भरमार के बावजूद लोग ठंड से जान गंवा रहे हैं। मनरेगा की मजदूरी तक में बेहिसाब घपला होता है। ऐसी आजादी की कल्पना तो नहीं की थी गांधी, सुभाष और टैगोर जैसे महापुरुषों ने। असल मायने में हम तब आजाद होंगे जब इन समस्याओं से पार पा लेंगे। देखना है कि ऐसा आखिर कब तक हो पाता है।

अभिषेक दुबे, दादरा एवं नगर हवेली

 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- http://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- http://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. Krishna Gee
    Aug 18, 2015 at 10:51 am
    व्यक्ति जब तक मानसिक रूप से स्वतंत्र नही हो जाता तब तक गुलामी का एहसास करता रहेगा
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग