ताज़ा खबर
 

चौपालः वायरस का वार

सोलह मई को रैंसमवेयर वायरस के जरिए दुनिया भर में हुआ साइबर हमला हमारे देश की जनता, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और सरकार के लिए कई अनसुलझे प्रश्न छोड़ गया है।
Author May 19, 2017 03:12 am

सोलह मई को रैंसमवेयर वायरस के जरिए दुनिया भर में हुआ साइबर हमला हमारे देश की जनता, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और सरकार के लिए कई अनसुलझे प्रश्न छोड़ गया है। हम अपनी अर्थव्यवस्था को नकद रहित प्रणाली की और ले जा रहे हैं लेकिन इसके साथ ही अपने लेन-देन की व्यवस्था को साइबर विश्व के हवाले भी कर रहे हैं। लेकिन यह कितना सुरक्षित है? आखिर भविष्य में रैंसमवेयर वायरस जैसे खतरों से निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं? भारत सरकार ने तो संकेत दिए हैं कि देश पर जून के अंत तक रैंसमवेयर वायरस का खतरा बना रहेगा। कई खबरें ऐसी भी हैं जिनमें कहा गया है कि इस वायरस के जड़ें उत्तर कोरिया में हैं। इससे इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि अगर तीसरा विश्वयुद्ध होता है तो परमाणु हथियारों के अलावा साइबर हमले जैसा घातक विकल्प भी महाशक्तियों के पास है।

विश्वयुद्ध के नजरिये से देखें तो पिछले सौ वर्षों के दौरान युद्ध का चेहरा नाटकीय रूप से विकसित हुआ है। प्रथम विश्व युद्ध में सैनिक गंदी खाइयों में खुद को खींच कर मोर्टारों को चकमा दे रहे थे। द्वितीय विश्व युद्ध में वी-2 रॉकेट और परमाणु बम ने समाचार बनाए और खाड़ी युद्ध हमें लंबी दूरी की मिसाइलों और अंत में ड्रोन तक ले आया। लेकिन आज हम पूरी तरह एक अलग किस्म के युद्धक्षेत्र और हथियारों के एक अलग ब्रांड का सामना कर रहे हैं जिसका आधार वे मशीनें हैं जो आपस में जुड़ी हुई हैं। एरिजोना में बैठा एक सैनिक पाकिस्तान में ड्रोन हमला कर सकता है, जबकि रूस में एक हैकर लक्ष्य से हजारों मील की दूरी पर कोड भेज सकता है। इससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो सकता है क्योंकि हम अपनी आत्मनिर्भरता मशीनों को सौंप रहे हैं फिर चाहे वे कोडिंग द्वारा तैयार किये गए रोबोट हों या दैनिक कामकाज में उपयोगी साबित होने वाले गैजेट हों। साइबर युद्ध के हर देश के लिए अपने-अपने मायने हैं। जो मुल्क तकनीकी स्तर पर अधिक विकसित हैं वहां खतरा और भी ज्यादा है क्योंकि ये हमले सरकार द्वारा प्रायोजित तो हो सकते हैं लेकिन उन्हें संचालित करने वाला आम नागरिक के भेष में छुपा कोई बागी हैकर भी हो सकता है जो स्टारबक्स की कॉफी पीते-पीते दुनियाभर में हड़कंप मचा सकता है फिर चाहे इसके नकारात्मक परिणाम उसके अपने देश को क्यों न भुगतने पड़ें।

साइबर संसार बड़ा ग्लैमरस है। बंगलुरु में फ्लिपकार्ट के एक कर्मचारी ने नौकरी से इस्तीफा सिर्फ इसलिए दे दिया कि हैकिंग से उसने इतनी कमाई कर ली थी जितनी वह फ्लिपकार्ट की नौकरी से पचास वर्षों में भी नहीं कर पाता। शायद रैंसमवेयर जैसे वायरस ने उसके दिमाग पर कब्जा कर उससे ऐसा काम करवा दिया। हो सकता है कि हैकिंग की आकर्षक दुनिया उसके सहकर्मियों को भी किसी दिन ऐसा करने को मजबूर कर दे। कुछ वर्ष पूर्व हुए बिटकॉइन हैकिंग प्रकरण को दुनियाभर के सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शायद ही कभी भुला पाएंगे। उस घटना को हैकिंग-विश्व की अब तक की सबसे बड़ी चोरी की संज्ञा तक दी गई। दुनिया भर में बढ़ रहे राजनयिक तनावों के साथ खुद से पूछने का सवाल यही है कि क्या हम एक और विश्व युद्ध देख पाएंगे? लेकिन कब? और जब भी ऐसा होगा तो माध्यम डिजिटल होने के आसार अधिक हैं। ऐसे में हमारा देश कहां खड़ा है, इस बात की समीक्षा सरकार को करनी चाहिए।
’जयेश पण्डया, उदयपुर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.