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चौपालः जीवन के अंग

कई बार इंटरनेट पर और अखबार में खबर पढ़ने को मिलता है कि एक व्यक्ति के अंगदान करने से कई लोगों को नई जिंदगी मिल गई। भारत जनसंख्या के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है।
Author May 20, 2017 03:27 am
(Express Photo)

कई बार इंटरनेट पर और अखबार में खबर पढ़ने को मिलता है कि एक व्यक्ति के अंगदान करने से कई लोगों को नई जिंदगी मिल गई। भारत जनसंख्या के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है। लेकिन यहां अंगदान के प्रति लोगों के बीच जागरूकता नहीं के बराबर है। उसमें भी लोगों के भीतर पसरा अंधविश्वास इस समस्या को और बढ़ावा देता है। जीवित व्यक्ति और ‘ब्रेन डेड’ यानी दिमागी तौर पर मृत व्यक्ति, दोनों के द्वारा अंगदान किया जा सकता है। भारत में जहां दुर्घटनाओं का आंकड़ा भयावह स्तर पर है, हजारों लोग रोज सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं, ऐसे लोगों के अंग भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति को लगाए जा सकते हैं।

भारत में स्थिति चिंताजनक इसलिए भी है कि लोगों को यह पता ही नहीं कि अगर अंगदान करना है तो वे कहां या किससे संपर्क करें। वजह यह है कि कुछ चुनिंदा अस्पताल ही इसके लिए अधिकृत हैं। दूसरी समस्या यह है कि जिन अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण की सुविधा है, वे आमतौर पर इसके लिए मरीजों से बहुत ज्यादा पैसे वसूलते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए जरूरी है कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय एक अभियान चलाए और लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करे। साथ ही इस अभियान में सभी अस्पतालों जोड़ा जाए।
इसके तहत लोगों के बीच जागरूकता का प्रसार करते हुए उनसे संकल्प पत्र भरवाया जा सकता है। उन्हें यह बताया जा सकता है कि वे इसके लिए कहां संपर्क कर सकते हैं। इस बारे में जो भ्रातियां हैं, उन्हें भी दूर करने की जरूरत है, ताकि लोग आगे आएं। हजारों लोग जो असमय ही काल कवलित हो जाते हैं, शायद इस तरह अंग मिलने से उनमें से बहुतों को नई जिंदगी मिल सकती है।
’शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल, तेलंगाना

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