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चौपालः कथनी बनाम करनी

इतना ही नहीं, उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन वायदों को जुमला तक बता दिया था। न बेरोजगारों को काम मिला, न महिलाओं को सुरक्षा और न किसानों की आत्महत्याएं रुकीं।
Author September 1, 2017 02:35 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

कथनी के अनुरूप परिणाम न देने के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोल अब न केवल पाखंडपूर्ण बल्कि अविश्वसनीय भी लगते हैं। यह प्रधानमंत्री की छवि और उनके कद के लिए शोभनीय नहीं है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि उनकी कथनी और करनी में दोहरापन है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान किए गए वायदों को उन्होंने भुला दिया है। इतना ही नहीं, उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन वायदों को जुमला तक बता दिया था। न बेरोजगारों को काम मिला, न महिलाओं को सुरक्षा और न किसानों की आत्महत्याएं रुकीं। कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, आतंकी घुसपैठ, महंगाई और अशांति घटने की बजाय और विकराल होकर सामने हैं। पहले नोटबंदी और फिर जीएसटी रोजगारहंता और दुर्दिनी के सबब बन कर आए हैं। पंद्रह लाख रोजगार खत्म हो जाने के समाचार हैं। इस साल 15 अगस्त को लालकिले से प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में कही गई लंबी-चौड़ी बातें भी केवल बोलने के लिए बोली गई लगती हैं।

कश्मीर समस्या को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिकारती भाव प्रदर्शित करते हुए ‘अढ़ाई जिले’ की समस्या बताते हैं और तमाम भाजपा प्रवक्ता गुस्साई भीड़ और पत्थर मारने वालों को उन्हीं की भाषा में जवाब देने की बात कहते हुए उन्हें ठिकाने लगाने की बातें करते हैं। साथ ही सेना की गाड़ी के बोनट पर भीड़ में से ही एक युवक को बांधकर पत्थरबाजों के बीच ले जाने वाले को पुरस्कृत करते हैं। संविधान की धारा 35 ए की समीक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए आई याचिका पर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के यह कहने पर कि ‘यदि केंद्र सरकार ने धारा 35 ए को हटाने का हलफनामा दिया तो कश्मीर घाटी में कोई तिरंगा उठाने वाला नहीं मिलेगा’, भाजपाई प्रवक्ताओं का महबूबा से इस्तीफा मांगना तो दूर, उनके मुंह सिले रहे।

इसके बाद तो हमारे गृहमंत्री की जुबान भी बदल गई। उन्हें अब कश्मीरियों में अनोखी कश्मीरियत नजर आने लगी और पंद्रह अगस्त को एकाएक प्रधानमंत्री ने कह दिया कि कश्मीर का समाधान गाली और गोली से नहीं, गले लगाने से होगा। जनाब, कश्मीर के लोग ही नहीं, कश्मीर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल तक कब से यही बात कह रहे हंै। कश्मीर मुद्दे पर तीन माह पहले जयपुर में एक संवाद गोष्ठी में पधारे जम्मू-कश्मीर के विधायक युसुफ तारगामी ने तब भी कहा था ‘पैलेटगन छोड़, एक बार कश्मीरियों को प्रेम से गले तो लगाइये, जरा कोशिश तो कीजिए आग बुझाने की’।
’रामचंद्र शर्मा, तरुछाया नगर, जयपुर

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  1. V
    vijay
    Sep 1, 2017 at 8:17 am
    jitna bola tha usay kohi jada korky dia hain ,bos achi noz dikhnywaly imsan hona chahiay,jo tere pas ya fir u kohu tu ondha hain ,bolnyse golat nehi hoga.gadmchky boit.tere jeisa admiko suchnyka jorurat nehi.
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