June 23, 2017

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चौपालः संयम के साथ

हाल में तीन खबरों ने सबका ध्यान खींचा है। पहली, स्नैपचैट के सीईओ ने कहा कि वे अपनी सेवाओं का विस्तार भारत जैसे ‘गरीब’ देश में नहीं करना चाहते।

Author April 21, 2017 03:36 am
स्नैपचैट

हाल में तीन खबरों ने सबका ध्यान खींचा है। पहली, स्नैपचैट के सीईओ ने कहा कि वे अपनी सेवाओं का विस्तार भारत जैसे ‘गरीब’ देश में नहीं करना चाहते। यह बयान स्नैपचैट के किसी पूर्व कर्मचारीने मीडिया में लीक किया था। जैसे ही यह खबर आई पूरा सोशल मीडिया देशभक्ति के रंग से रंग गया। स्नैपचैट को लाखों लोगों ने ‘अनइंस्टाल’ तो किया ही, भारतीय हैकरों ने भी उस पर अपना निशाना साधा। कारण था, भाई हम लोगों को गरीब कैसे कह दिया! दूसरी खबर लोकप्रिय गायक सोनू निगम के बयान से संबंधित है जिसमें उन्होंने कहा कि मैं मुसलिम नहीं हूं फिर भी सुबह अजान की आवाज से जागा; पता नहीं कब तक धार्मिक रीतियों को जबरन ढोना पड़ेगा! उन्हें उन लाउडस्पीकर्स से आपत्ति थी जो तमाम धार्मिक उत्सवों में जोर शोर से बजाए जाते हैं। इस बयान पर पूरा देश फिर से चिल्ला उठा, अरे भाई ये क्या बोल दिया? एक मौलवी ने फतवा देकर लाखों के ईनाम की घोषणा कर दी। सोनू निगम अब सिर मुंडाए घूम रहे हैं।

तीसरी खबर तेज बहादुर यादव के बारे में है जिसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था। वीडियो में उसने बताया था कि देश के लिए मर मिटने वाले सैनिकों को दो वक्त का ढंग का खाना भी नसीब नहीं होता। खबर आई है कि बीएसफ की छवि खराब करने के लिए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। ये तीन खबरें सिर्फ एक ओर इशारा करती हैं कि हम कितने असहिष्णु हो गए हैं! हमने सुनना छोड़ दिया है, क्योंकि उतना धैर्य हम में बचा ही नहीं है। स्नैपचैट के सीईओ के बयान के बाद यह जानने की कोशिश किसी ने नहीं की कि इसमें सच्चाई है भी या नहीं। वह बयान भारत और स्पेन दोनों के बारे में था लेकिन स्पेन के लोगों ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि उनके लिए यह कोई इतनी महत्त्वपूर्ण बात नहीं थी। सोनू निगम ने लाउडस्पीकर्स से होने वाली परेशानी की तरफ ध्यान आकर्षित किया। लाउडस्पीकर्स न केवल ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं, बल्कि लोगों की परेशानी का कारण बनते हैं। उन विद्यार्थियों से पूछिए जिनकी परीक्षा होती है और ये लाउडस्पीकर्स उन्हें चैन से पढ़ने नहीं देते। रोगियों को, छोटे बच्चों को सबको दिक्कत होती है। बीएसएफ के जवान को नौकरी से निकाला जाना भी बेहद अफसोसनाक है। यह मामला बताता है कि आप समस्या को हल करने की बजाय उस आवाज को ही दबा देना उचित समझते हैं जिसने समस्या सबके सामने रखी। तानाशाही हमेशा विध्वंस का कारण रही है, यह जानना जरूरी है।

ये तीन खबरें हमारी मानसिकता को उजागर करती हैं। अचानक हम इतने असहिष्णु कैसे हो गए हैं? क्यों हमें सच्ची बातें चुभती हैं? क्यों हम अपने दिमाग से काम नहीं लेते? स्नैपचैट से खुद को निकाल लेना आपको देशभक्त नहीं बनाता, इससे अच्छा होगा कि देश के लिए कुछ करो। लोगों को चाहिए कि सोशल साइट्स पर ऐसी खबरों पर प्रतिक्रिया देने की बजाय उन्हें दरकिनार करें, ताकि खबरें बेचने वालों को उचित जवाब मिल सके। वैसे भी इस देश में बहुत समस्याएं हैं, जिनके समाधान की जरूरत है। साथ ही आवश्यकता है थोड़े धैर्य, थोड़े संयम और थोड़े सहिष्णु बनने की।
’शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल, तेलंगान

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First Published on April 21, 2017 3:36 am

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