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चौपालः लूट की निकासी

देश में नकदी विहीन लेन-देन के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है। इसे बनाने के लिए कम से कम पंद्रह से बीस वर्ष का समय लगेगा।
Author March 10, 2017 02:36 am
4 से ज्यादा बार कैश ट्रांजेक्शन पर पेनल्टी ( सांकेतिक फोटो)

देश में नकदी विहीन लेन-देन के लिए पर्याप्त आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं है। इसे बनाने के लिए कम से कम पंद्रह से बीस वर्ष का समय लगेगा। इसके बावजूद बैंक नकदी विहीन लेन-देन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एटीएम मशीन से हर चौथी निकासी के बाद 150 रुपए हर्जाना काटने को कह रहे हैं। यह समझ नहीं आ रहा है। भारत जैसे देश में, जहां नकदी विहीन लेन-देन के लिए आधारभूत ढांचा लगभग नगण्य है, नकदी विहीन लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना ठीक होगा, न कि हर्जाना काट कर उन्हें जबरन मजबूर करना। हर्जाना काटना बैंकों की धूर्तता है,मनमानी है। यह अलोकतांत्रिक भी है। धूर्तता इसलिए कि सीमा से अधिक निकासी पर हर्जाना पहले भी काटा जाता था, लेकिन वह अब के मुकाबले लगभग दस गुना कम था। 150 रुपए हजार्ने को ‘कैशलेस’ के नाम पर जायज ठहराया जा रहा है, जबकि कहानी बिल्कुल अलग है।

हुआ यह है कि विमुद्रीकरण से बैंकों और सरकार को जो फायदा होने वाला था वह नहीं हुआ है। सारे पुराने नोट वापस आ गए हैं। विमुद्रीकरण के दौरान बैंकों के कर्मचारी सिर्फ नोट बदलने के काम में लगे रहे थे। इससे बैंक उस दौरान कर्ज नहीं दे पाए। इन कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य करने के लिए बैंकों को अतिरिक्त मेहनताना भी देना पड़ा। इसके अलावा इस दौरान अतिरिक्त सुरक्षा पर भी बैंकों को खर्चा करना पड़ा। एक अनुमान के मुताबिक विमुद्रीकरण के तीन महीनों के दौरान विभिन्न बैंकों को 35,000 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़े और करीब 5,000 करोड़ रुपए का सेवा संबंधी नुकसान उठाना पड़ा। इसकी भरपाई की आशा बैंकों ने विमुद्रीकरण के जरिए बैंकों में जबरन रोकी गई मुद्रा को मझले उद्योगपतियों को निम्न ब्याज दरों पर कर्ज देने की योजना बना कर की थी। लेकिन बाजार में मांग पिछले एक दशक से लगातार कम हो रही है।

विमुद्रीकरण के दौरान यह और तेजी से कम हो गई। लिहाजा, उद्योगपतियों के लिए कर्ज लेकर उद्योगों में निवेश करने का कोई कारण ही नहीं था, अब भी नहीं है। इसलिए बैंकों की भरपाई संबंधी योजना विफल हो गई। इसके साथ ही जबरन जमा की गई मुद्रा पर भी लोगों को बैंकों को ब्याज अदा करना है। इसलिए यह दस गुना बढ़ा हुआ हर्जाना लगाया जा रहा है। ‘कैशलेस’ को फिर से एक बार बस जुमले की तरह प्रयोग किया जा रहा है।
’मुरारी त्रिपाठी, कानपुर

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