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जुर्म और दंड

मुंबई हाइकोर्ट के एक फैसले के मुताबिक अपने प्रेमी के साथ सहमति से बनाए गए संबंध अब बलात्कार की श्रेणी में नहीं आएंगे।
Author नई दिल्ली | February 13, 2017 06:23 am
बंबई उच्च न्यायालय

मुंबई हाइकोर्ट के एक फैसले के मुताबिक अपने प्रेमी के साथ सहमति से बनाए गए संबंध अब बलात्कार की श्रेणी में नहीं आएंगे, लिहाजा अब प्रेमिका अपने प्रेमी पर यह आरोप नहीं लगा सकती कि शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए हैं। यह फैसला अदालत ने एक इक्कीस वर्षीय युवक की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सुनाया है जिस पर उसकी पूर्व गर्लफ्रेंड ने ब्रेकअप के बाद बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। न्यायमूर्ति भटकर ने कहा, ‘अगर कोई धोखा देकर लड़की की सहमति हासिल करे तो वहां प्रलोभन की बात समझ में आती है। प्रथम दृष्टया यह मानने के लिए कुछ सबूत तो होने चाहिए कि लड़की को इस हद तक झांसा दिया गया कि वह शारीरिक संबंध बनाने को राजी हो गई। इस तरह के मामलों में शादी का वादा प्रलोभन नहीं माना जा सकता।’

हाइकोर्ट का यह फैसला निर्दोष लड़कों के लिए तो सराहनीय कदम है लेकिन जब दुष्कर्म की वारदातों में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज हो रही है तो इसमें कुछ सवालों और आंकड़ों को नजरअंदाज कर दिया गया है जो सोचनीय है। मुंबई पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक बलात्कार के 71.9 फीसद मामलों में आरोपी पीड़िता के प्रेमी होते हैं, जिन्होंने शादी का झांसा देकर उनके साथ दुष्कर्म किया होता है। दिल्ली पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार 2016 में जितने भी बलात्कार के मामले दर्ज हुए, उनमें से एक चौथाई शादी का झांसा देकर किए गए रेप के थे। हाइकोर्ट के फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्र की उन लड़कियों के लिए समस्या पैदा हो जाएगी जो पढ़ी-लिखी तो जरूर हैं लेकिन शादी के झांसे के चलते प्रेमी के बहकावे में आ जाती हैं। ऐसे मामलों में सबूत देना भी थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इस फैसले से लिव इन रिलेशन में रह रही युवतियों के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है क्योंकि वे अपने साथ हुए बलात्कार का मामला भी दर्ज नहीं करा पाएंगी।
विनीता मंडल, इलाहाबाद)

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