May 27, 2017

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चौपालः अफवाह का सिक्का

नोटबंदी के बाद देश में फुटकर करेंसी की बाढ़-सी आ गई है। दस रुपए के सिक्के तो इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

Author May 11, 2017 02:20 am
दस रुपए के सिक्के तो इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

नोटबंदी के बाद देश में फुटकर करेंसी की बाढ़-सी आ गई है। दस रुपए के सिक्के तो इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक 200 करोड़ की रेजगारी में 120 करोड़ की रेजगारी दस रुपए के सिक्कों में है। आये दिन इन सिक्कों को लेकर दुकानदारों और ग्राहकों में विवाद खड़ा हो जाता है। इस विवाद की एक वजह यह अफवाह रही कि दस रुपए के पंद्रह लाइन वाले सिक्के नकली और दस लाइनों व रुपए के चिह्न वाले सिक्के असली हैं। कुछ समय बाद रिजर्व बैंक ने इस बाबत ठोस कदम उठाते हुए एक नोटिस जारी किया जिसमें दोनों तरह के सिक्कों को वैध बताया गया। रिजर्व बैंक ने अपने नोटिस में दस रुपए के सिक्कों का लेनदेन न करने वालों पर भारतीय मुद्रा के अपमान के जुर्म में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की बात कही थी। लेकिन इसके बावजूद आज भी व्यापारियों और आम जनता के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि बैंक दस रुपए के सिक्के जमा करने को तैयार नहीं हैं।

नोटबंदी के बाद बैंकों ने थैलियों में भर-भरकर दस रुपए के सिक्कों की रेजगारी बाजार में प्रचलित की थी। आलम यह था कि दिहाड़ी मजदूरों से लेकर छोटी कंपनियों में काम करने वालों को साप्ताहिक और मासिक वेतन दस रुपए के सिक्कों में मिलता रहा। ऐसे में नौकरी पेशा करे तो क्या करे? आये दिन बाजार में दस रुपए के सिक्कों की रेजगारी को लेकर दुकानदारों से विवाद करे या बैंकों में लाइन लगाकर बैंक मैनेजर से। सवाल है कि आखिर रिजर्व बैंक ने अभी तक दस रुपए के सिक्कों को लेकर बैंकों के लिए दिशा-निर्देश क्यों नहीं जारी किए?

टैंपो चालक, फुटकर व्यापारी, छोटे दुकानदार, सब्जीवाले आदि ऐसे बहुत से लोग हैं जिनका रोजगार चिल्लर करेंसी पर आधारित है। एक तरफ सरकार व्यापारियों और जनता को बैंक में पैसे जमा करने के लिए जागरूक कर रही है वहीं दूसरी तरफ बैंकों द्वारा दस रुपए के सिक्के न जमा करना निराशाजनक है। नोटबंदी के दौरान बैंकों का कहना था कि काम के बोझ के कारण दस रुपए के सिक्के जमा कर पाना मुश्किल है। पर अब तो नोटबंदी को छह महीने से ज्यादा बीत चुके हैं फिर भी स्थिति ज्यों की त्यों है। इसमें दो राय नहीं कि 20000 रुपए जमा करने के लिए बैंक अधिकारी को दस रुपए के 2000 सिक्के गिनने पड़ेंगे और वक्त लगेगा। पर यहां सवाल बैंकों की लापरवाही और रिजर्व बैंक का दस रुपए के सिक्कों की समस्या का नजरअंदाज करना है। रिजर्व बैंक की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगााया जा सकता है कि इस पूरे मुद्दे पर अभी तक उसके गर्वनर उर्जित पटेल ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। रिजर्व बैंक का दायित्व है कि जनता की इस समस्या को दूर करने के लिए बैंकों में दस रुपए के सिक्के गिनने वाली मशीनें जल्द से जल्द लगवाए अथवा बैंक अधिकारियों को एक दिन में किसी निश्चित सीमा के तहत ये सिक्के जमा करने का आदेश दिया जाए।
’कर्तव्य खन्ना, गुजैनी, कानपुर

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First Published on May 11, 2017 2:06 am

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