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चौपाल : नीदरलैंड की नजीर

एक बार फिर स्कैंडिनोविआई देश धरती पर सबसे अधिक खुशहाल साबित हुए। 156 मुल्कों की सूची में भारत, पाकिस्तान और नेपाल से पीछे 122 वें स्थान पर रहा।
Author March 25, 2017 06:25 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर। (Source: dreamstime)

एक बार फिर स्कैंडिनोविआई देश धरती पर सबसे अधिक खुशहाल साबित हुए। 156 मुल्कों की सूची में भारत, पाकिस्तान और नेपाल से पीछे 122 वें स्थान पर रहा। स्कैंडिनेवियाई देशों में आर्थिक नीतियां समाजवादी हैं। मतलब अमीरों से ज्यादा टैक्स लिया जाता है और गरीबों को आर्थिक, सामाजिक व स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा प्रदान की जाती है, उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाया जाता है। इस कारण वहां के लोग धर्म और परंपरा के जाल में नहीं फंसते। धर्म की जड़ें वहां ज्यादा गहरी होती हैं जहां गरीबी, कुपोषण और अशिक्षा का बोलबाला होता है। दुनिया के सत्तर प्रतिशत नास्तिक इन्हीं देशों में रहते हैं। इन देशों में धार्मिक कट्टरवादी या दक्षिणपंथी उग्र राष्ट्रवादी राजनीति भी अपने पैर नहीं जमा पाती है। जब सबका स्वास्थ्य अच्छा है, सब शिक्षित हैं, कानून व्यवस्था चौकस है, नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह से सचेत हैं, मध्यकालीन मूल्यों और संस्कृति को खत्म किया जा चुका है, प्रत्येक व्यक्ति के पास रोजगार है और उसका भविष्य सुरक्षित है, तो क्यों कोई धर्म और उग्र राष्ट्रवाद के जाल में फंसेगा!

नीदरलैंड इस सूची में छठे स्थान पर है। वहां इस बार चुनाव हुए और एक कमाल की बात यह रही कि जब अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक दक्षिणपंथी राजनीति इस्लामोफोबिया और उग्र राष्ट्रवाद के उन्मादी मुद्दों पर विजेता बन कर उभरी है, तब नीदरलैंड के सहिष्णु समाज ने उसे नकार दिया; मुसलमानों को भगा देने और मस्जिदों को तोड़ने की बात करने वाले नेता को प्रगतिशील जनता ने कोई तरजीह नहीं दी। उसकी जगह समाज ने पर्यावरण की सुरक्षा और सहअस्तित्व जैसे मानवतावादी मुद्दों को उठाने वाले एक तीस वर्षीय नेता को जिता दिया। गौरतलब है भी कि नीदरलैंड ने पिछले साल अपनी जेलें बंद कर दी थीं क्योंकि उनमें डालने के लिए कैदी ही नहीं बचे थे। वहां रेलगाड़ियां पवन ऊर्जा से चलती हैं, प्रदूषण फैलाने वाले र्इंधनों का बहुत कम इस्तेमाल होता है। इसके बावजूद लोग पर्यावरण को और अधिक संरक्षित करने के मुद्दे पर चुनाव जीत जाते हैं। काश कि हम भी अपने देश को ऐसा बना पाएं! काश कि पूरी दुनिया ही ऐसी बन जाए!
मुरारी त्रिपाठी, कानपुर

खुशहाली के मामले में पाक, बांग्लादेश से भी पीछे है भारत

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