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कैशलेस का सपना

भारतीय अर्थव्यवस्था नकदी पर आधारित है। इसमें कृषि और दिहाड़ी मजदूरों का आंशिक प्रतिशत अधिक है।
Author January 20, 2017 03:09 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था नकदी पर आधारित है। इसमें कृषि और दिहाड़ी मजदूरों का आंशिक प्रतिशत अधिक है। सरकार द्वारा शत-प्रतिशत बैंकिंग के दावे के बावजूद कई गांवों में बैंक और डाकघर की सुविधा नहीं है। वहां आज भी स्वयं सहायता समूहों के जरिए लेन-देन होता है। ऐसे में बैंक खाते से वंचित और ई-लेनदेन से अनभिज्ञ लोगों के सामने एक गंभीर संकट उभरेगा। सरकार का यह कदम शहरी क्षेत्रों में तो काफी हद तक सफल होगा, पर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार को इसके लिए ‘उर्वर भूमि’ तैयार करनी होगी, जैसे- बैंकिंग अधिकारियों की नियुक्ति, जागरूकता अभियान आदि। बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की तरह बैंकिंग अधिकारियों को भी कुछ समय के लिए ही सही, यदि एक रात गांव में विश्राम के लिए कहा जाए तो उचित परिणाम मिल सकते हैं।
स्वयं सहायता समूह सरकार से मान्यता प्राप्त होते हैं। यदि इन समूहों का लेन-देन कैशलेस हो तो न केवल सारे सदस्य इस व्यवस्था से परिचित होंगे बल्कि अन्य ग्रामीणों को भी अधिक आसानी से इस बारे में अवगत करा सकेंगे।
’रवि तोमर, नंदा नगर, इंदौर

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