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रिश्तों की डोर

ऐसा लगता है कि नई सूचना तकनीक से हम लोगों से आसानी से जुड़ पा रहे हैं। यह काफी हद तक सही भी है कि इस उन्नत तकनीक के आने से हम आसानी से सबसे जुड़ पाते हैं, बात कर पाते हैं, इससे खबरों का आदान-प्रदान भी काफी हद तक बढ़ा है। विश्व को एक […]
Author नई दिल्ली | September 21, 2015 15:59 pm

ऐसा लगता है कि नई सूचना तकनीक से हम लोगों से आसानी से जुड़ पा रहे हैं। यह काफी हद तक सही भी है कि इस उन्नत तकनीक के आने से हम आसानी से सबसे जुड़ पाते हैं, बात कर पाते हैं, इससे खबरों का आदान-प्रदान भी काफी हद तक बढ़ा है। विश्व को एक ग्लोबल गांव बनाने का सपना साकार हुआ है।

मगर यह भी सही है कि इसने हमारे रिश्तों को काफी हद तक कमजोर किया है! और तो और कई बार बिना बात के झगड़े, एक-दूसरे की बातों को समझ न पाना, सभी बातें ऑनलाइन करना, जिससे कि लोगों का सामने बात करना बहुत कम हुआ है। हर समय इसको प्रयोग करते रहने से सामाजिक कटाव की स्थिति पैदा हुई है। जो आने वाले समय में हमारे लिए, समाज के लिए खतरा हो सकता है। इसके बढ़ते प्रयोग से होने वाले और हो रहे नुकसान पर ध्यान देने की जरूरत है?
अंतरिक्ष कर सिंह, भोपाल

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