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योग की राजनीति

मीडिया में आजकल दिल्ली की राजनीति और योग सुर्खियां बटोर रहे हैं। यह कहना मुश्किल होगा कि राजनीति का योग चल रहा है या योग की राजनीति हो रही है। लेकिन माहौल ऐसा बना दिया गया है, जो योग करेगा वह सरकार हितैषी है और जो नहीं करेगा वह धुर विरोधी। अपने को योगी कहने […]
Author June 22, 2015 17:59 pm

मीडिया में आजकल दिल्ली की राजनीति और योग सुर्खियां बटोर रहे हैं। यह कहना मुश्किल होगा कि राजनीति का योग चल रहा है या योग की राजनीति हो रही है। लेकिन माहौल ऐसा बना दिया गया है, जो योग करेगा वह सरकार हितैषी है और जो नहीं करेगा वह धुर विरोधी। अपने को योगी कहने वाले, खुद योग की कसौटी पर कितने खरे उतरते हैं? योगी अवधूत की तरह जीवनयापन करता है।

भौतिकता के स्वाद के लिए उसकी जीभ लालायित नहीं रहती। योगी आदित्यनाथ की भाषा में कटुता है, उनके शब्द समाज में जहर घोलने का काम करते हैं, लेकिन वे आदी हैं, उन्हें किसी तरह खबरों में बने रहना है। यही हाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का है, उन पर अहं का भूत सवार है। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि मैं राहुल गांधी नहीं हूं, मैं अकेला हूं, उसमें अहंकार निहित हैं, केजरीवाल को ‘मैं से हम’ की राजनीति करनी चाहिए। बेशक, उनके माथे पर चिंता की लकीरें जायज हैं।

केंद्र और राज्य के बीच तबादलों और नियुक्तियों की तनातनी और खींचतान के बीच संबंधों की बागडोर ढीली पड़ गई है। क्योंकि मैं अकेला हूं? केजरीवाल सरकार वीडियो, टेप रिकॉर्डिंग और अंतरकलह से बाहर नहीं आ पाई, तब तक अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों पर बदले की गाज गिरने के संकेत मिल रहे हैं। खबर है दिल्ली पुलिस आम आदमी पार्टी (आप) के इक्कीस विधायकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने जा रही है।

योग का अर्थ जोड़ना भी होता है। भारतीय जनता पार्टी में पार्टी का योग चल रहा है। अब देखना होगा कि क्या भाजपा योग के जरिए ललित मोदी मुद्दे से लोगों का ध्यान भटका सकती है।
बृज किशोर, जादौन, आगरा

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  1. D
    dhaempal panchal
    Jun 24, 2015 at 6:22 am
    केजरियाल अलग किस्म के नेता है भारत के लोग और मीडिया को समय लगेगा भारत की किस्मत नै सोच और राजनीती अलग बना दी है मोदी और केजरीवाल के बाद राजे रजवाड़ों की छुट्टी हो गयी
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    1. उर्मिला.अशोक.शहा
      Jun 22, 2015 at 6:47 pm
      वन्दे मातरम-मोदी सरकार को बदनाम करनेके लिए मुद्दो की कमी होने की वजह से तिनको की तलाश में विपक्ष और पेड़ मिडिया है ललित मोदी सुषमास्वराज और वसुंधरा राजे प्रकरण में अगर विपक्ष के पास भ्रष्टाचार के ठोस सबूत है तो सुप्रीम का दरवाजा खट खटाये लेकिन झुटे आरोप करके सस्ती लोकप्रियता ोरना सिर्फ बेकार नेताही कर सकते है जा ग ते र हो
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