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संकट का समाधान

ग्रीस का संकट, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की विश्वव्यापी मंदी की आशंका, अर्थशास्त्रियों का आर्थिक संकट के समाधान के लिए नई मांग उत्पन्न कर अर्थव्यवस्था में उछाल लाने का सुझाव, और मार्क्स द्वारा ‘उत्पादन का, मांग की जगह मुनाफे द्वारा चालित होना’, की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के मौलिक गुण के रूप में पहचान
Author July 1, 2015 17:19 pm

ग्रीस का संकट, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की विश्वव्यापी मंदी की आशंका, अर्थशास्त्रियों का आर्थिक संकट के समाधान के लिए नई मांग उत्पन्न कर अर्थव्यवस्था में उछाल लाने का सुझाव, और मार्क्स द्वारा ‘उत्पादन का, मांग की जगह मुनाफे द्वारा चालित होना’, की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के मौलिक गुण के रूप में पहचान और उसके हर छह-सात साल में आर्थिक संकट से गुजरने की चेतावनी, एक ही तस्वीर के अलग-अलग पहलू हैं।

मार्क्स ने उत्पाद को परिभाषित करते हुए कहा था कि उत्पाद शरीर के बाहर ऐसी चीज है जो व्यक्ति की किसी मांग को संतुष्ट करता है, मांग चाहे पेट से पैदा हो या मस्तिष्क से। विपन्नों की पेट से पैदा मांगों को संतुष्ट करने के लिए आवश्यक उत्पादों की भारी जरूरत के बावजूद संपन्नों की मस्तिष्क से पैदा होने वाली मांगों को कृत्रिम रूप से बढ़ाने में संसाधन जुटाना पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का विशिष्ट गुण है।

सामंतवादी और बुर्जुआ उत्पादन व्यवस्था के व्यक्तिगत उत्पादन की तुलना में, पूंजीवादी उत्पादन व्यवस्था के सामूहिक उत्पादन को मार्क्स ने गुणात्मक रूप से उन्नत उत्पादक शक्ति कहा था। सामूहिक रूप से उत्पन्न किए गए अतिरिक्त मूल्य का मुनाफे के रूप में व्यक्तिगत हस्तांतरण पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का अंतर्निहित अंतर्विरोध है। इस अंतर्विरोध के समाधान में ही अंतर्निहित है आर्थिक संकट का समाधान।
सुरेश श्रीवास्तव, नोएडा

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