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नाम की बात

प्रगतिशील हिंदू ने अपने बेटे का नाम औरंगजेब या वाजिद अली रखा हो और किसी प्रगतिशील मुसलमान ने लक्ष्मण प्रसाद या परशुराम रखा हो!
Author May 31, 2017 05:34 am
यह चित्र प्रतीक के रूप में प्रयोग किया गया है

विकृत मानसिकता
केंद्र सरकार ने पशु बाजारों में, बूचड़खानों के लिए जानवरों को खरीदने और बेचने पर रोक क्या लगाई कि इसका विरोध करने के लिए केरल के कन्नूर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कैमरे के सामने सरेआम एक बछड़े को काटा और बीफ पार्टी की। राजनीति में किसी फैसले का विरोध करना तो ठीक है पर इसके लिए सार्वजनिक रूप से एक निरीह बछड़े की हत्या करना और उसका प्रदर्शन करना सर्वथा अनुचित है।
ऐसा करके कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी विकृत मानसिकता का परिचय दिया है। लगता है, चुनावों में एक के बाद एक हार मिलने की हताशा में कांग्रेस कार्यकर्ता विवेक को ताक पर रख कर ऐसी निंदनीय हरकत कर बैठे हैं। एक निरीह बेजुबान की हत्या करने वाले सभी लोगों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।
’बृजेश श्रीवास्तव, गाजियाबाद
नाम की बात

वह बुद्धिजीवी ही क्या, जो बेसिर-पैर की बात न करे? कुछ महीने पहले चंद युवा जोर-शोर से बता रहे थे कि हर किसी की मर्जी है कि वह अपने बच्चे का नाम जो चाहे रखे। वे शेक्सपियर की तरह यह भी बता रहे थे कि नाम में क्या रखा है! हंसी इसलिए आती है कि जो वे बोल रहे थे उसे हम सब पहले से जानते हैं। सवाल है कि जिस बच्चे के नाम पर चर्चा थी, उसके मां-बाप लोगों की चर्चा के केंद्र में रहते हैं। वे समाचार बनते हैं। इसलिए नाम भी समाचार बनेगा, ऐसा वे बखूबी जानते थे। मुझे नहीं लगता कि कभी किसी प्रगतिशील हिंदू ने अपने बेटे का नाम औरंगजेब या वाजिद अली रखा हो और किसी प्रगतिशील मुसलमान ने लक्ष्मण प्रसाद या परशुराम रखा हो! इसका सीधा मतलब है कि नाम का कुछ अर्थ, कुछ मतलब जरूर होता है। इसीलिए अपने बच्चे का नाम आप खच्चर या उल्लू तो नहीं रखते! और अगर नाम का कोई अर्थ न हो तो फिर क्यों कुछ लोग शादी के बाद अक्सर अपनी बीवियों का नाम बदलते हैं?
सवाल सौ हैं। सामाजिक समरसता और सद््भाव के लिए जरूरी है कि हम कुछ बुनियादी बातों का ख्याल रखें। कोई भी हाथ घुमाने के लिए स्वतंत्र है लेकिन खयाल रहे, उसका हाथ दूसरे की नाक को न छुए। बाकी किसी की मर्जी, वह अपने बच्चे का नाम गाजी रखे या पाजी, किसी को क्या! खुद अपने नाम पर भी विचार करो कि आपके मां-बाप ने आपका नाम एक्स जेड क्यों नहीं रखा ? नाम में भले ही कुछ न हो, लेकिन सभी धर्मों में आज भी बच्चे का नाम रखते समय कुछ खास रीति-रिवाज निभाए जाते हैं।
’सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

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