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चौपाल : ब्रेग्जिट से लेग्जिट

ब्रिटेन के ब्रेग्जिट से अभी वैश्विक चिंताओं का तूफान थमा भी नहीं था कि लंदनवासियों ने लेग्जिट नाम से नया बवाल शुरूकर दिया। लंदन के मेयर सादिक खान के नाम से एक आॅनलाइन याचिका ब्रिटिश संसद की वेबसाइट पर शुरू हुई है।
Author नई दिल्ली | July 7, 2016 00:53 am
रेफरेंडम के बाद आर्थिक अनश्चितता आनी तय है। (Source: AP)

ब्रिटेन के ब्रेग्जिट से अभी वैश्विक चिंताओं का तूफान थमा भी नहीं था कि लंदनवासियों ने लेग्जिट नाम से नया बवाल शुरूकर दिया। लंदन के मेयर सादिक खान के नाम से एक आॅनलाइन याचिका ब्रिटिश संसद की वेबसाइट पर शुरू हुई है जिसमें मांग की गई है कि लंदन को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया जाए। इसमें यह भी दर्ज किया गया है कि लंदन स्वतंत्र तौर पर यूरोपियन यूनियन (ईयू) का हिस्सा बना रहना चाहता है। अब तक हजारों लोग इस आॅनलाइन याचिका को अपना पूर्ण समर्थन दे चुके हैं। यूरोपियन यूनियन की सदस्यता पर ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह के नतीजे बता रहे थे कि इसमें साठ फीसद से अधिक वोट लंदनवासियों ने ईयू का सदस्य बने रहने के पक्ष में डाले थे। जबकि इंग्लैंड के अधिकतर हिस्सों ने ईयू से अलग होने के पक्ष में वोट डाला था। याचिका शुरूकरने वाले जेम्स ओ मैले का कहना है कि ब्रिटेन की राजधानी लंदन एक वैश्विक शहर है जो यूरोप के बिना अधूरा है।

लंदन के मेयर खान का मानना है कि यूरोपीय संघ के साथ बातचीत में लंदन की बात सुनी जाए कि हम संघ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं। इसके साथ-साथ लंदन में अब यह मांग ज्यादा जोर पकड़ती जा रही है कि लंदन को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया जाए। उधर ब्रिटेन में भी, जनमत संग्रह के नतीजे जो भी रहे हों, अब तक दस लाख से ज्यादा लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर यह मांग उठा दी है कि यूरोपीय संघ की सदस्यता पर दोबारा जनमत संग्रह कराया जाए और ब्रिटिश सरकार ऐसा कानून बनाए कि ब्रिटेन के ईयू छोड़ने या उसमें बने रहने के पक्ष में यदि साठ फीसद से कम वोट आते हैं तो दोबारा जनमत संग्रह कराया जाएगा। साथ ही दूसरा नियम यह भी हो कि इसमें कम से कम पचहत्तर फीसद मतदाता अवश्य हिस्सा लें।

मुकेश कुमार, महावीर एनक्लेव, दिल्ली

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