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चौपाल: बंदूक संस्कृति

दुनिया की मात्र पांच प्रतिशत आबादी वाले अमेरिका के पास विश्व की कुल बंदूकों का 48 प्रतिशत हिस्सा है अर्थात इसके 89 प्रतिशत नागरिक बंदूकधारी हैं।
Author October 9, 2017 06:12 am
अमेरिका के लास वेगास में संगीत कंसर्ट के दौरान हुई गोलीबारी।

बंदूक संस्कृति
अमेरिकी शहर लॉस वेगास में हुआ हमला, 9/11 के बाद सबसे बड़ा हमला है जिसमें एक अधेड़ हमलावर ने संगीत सभा के दौरान एकत्रित लोगों की भीड़ पर ताबड़तोड़ गोलियां चलार्इं और 58 बेगुनाह नागरिकों को मार डाला। इस वीभत्स घटना ने एक बार फिर अमेरिकी बंदूक संस्कृति पर बहस छेड़ दी है। यहां गौरतलब है कि दुनिया की मात्र पांच प्रतिशत आबादी वाले अमेरिका के पास विश्व की कुल बंदूकों का 48 प्रतिशत हिस्सा है अर्थात इसके 89 प्रतिशत नागरिक बंदूकधारी हैं। सेंटर फॉर डिसीज एंड प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट बताती है कि अकेले अमेरिका में प्रतिवर्ष 12000 हजार मौतें बंदूकों के कारण होती हैं जो ट्रंप सरकार के लिए गहन चिंता का विषय है।

दरअसल, अमेरिका में हथियार रखना एक बुनियादी हक है, जिससे वहां लोग आसानी से हथियार खरीदते और जमा करते हैं। लंबे समय से अमेरिकी समुदाय इस मामले में एक ‘गन पॉलिसी’ बनाने की मांग कर रहा है, पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हथियार उद्योग का एक बड़ा योगदान है और वहां के राजनीतिक दलों को इस उद्योग से मिलने वाला मोटा चंदा इस मांग को दबा देता होता है।  पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अमेरिकी सीनेट में बंदूक संस्कृति के प्रति चिंता व्यक्त की थी पर सत्तर प्रतिशत सांसदों के इसके समर्थन में होने से ओबामा भी बेबस रहे थे। अब लॉस वेगास के दर्दनाक हत्याकांड से सबक लेकर ‘अमेरिका प्रथम’ की बात करने वाले राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी बंदूक मोह नीति की पुन: समीक्षा के साथ उपचारात्मक सुधार के कदम उठाने चाहिए।
’दिपेंद्र सिंह चौहान, अलवर, राजस्थान
पेंशन में देरी
सरकार अपने सामाजिक दायित्व के प्रति कितनी अधिक संवेदनहीन है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह असहाय वृद्धजनों को समय से वृद्धावस्था पेंशन नहीं दे रही है। इन दिनों महज चार सौ रुपए की राशि वृद्धावस्था पेंशन के रूप में दी जाती है लेकिन अफसोसनाक है कि बिहार में साल भर से कई वृद्धों को यह पेंशन नहीं मिली है। आज के महंगे दौर में जीवन यापन के लिए चार सौ रुपए बहुत अधिक नहीं कहे जा सकते, लेकिन इसके लिए भी असहाय वृद्धजन काफी उम्मीद लगाए रहते हैं। सरकार वृद्धों के सम्मान में कम से कम पेंशन की राशि समय से देने की व्यवस्था करे।
’मिथिलेश कुमार, भागलपुर, बिहार

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