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चौपाल- कब तक

आजीवन जोहरा की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे। इससे पहले भी गंभीर सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के परिवारों की मदद के लिए आगे
Author September 9, 2017 02:48 am
भारत के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर ने 147 वनडे मैचों में 5238, जबकि 58 टेस्ट मैचों में 4154 रन बनाए हैं।(Photo Courtesy: Twitter)

कब तक
जम्मू-कश्मीर में 28 अगस्त को आतंकी हमले में शहीद हुए एएसआई अब्दुल रशीद की पांच साल बेटी जोहरा की मदद के लिए भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनिंग बल्लेबाज गौतम गंभीर आगे आए हैं। वे आजीवन जोहरा की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे। इससे पहले भी गंभीर सुकमा में नक्सली हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवानों के परिवारों की मदद के लिए आगे आए थे। उन्होंने शहीद पच्चीस जवानों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का ऐलान किया था।
बेशक, गौतम गंभीर की यह पहल प्रशंसनीय है। लेकिन आखिर कब तक चरमपंथी हमलों में हम अपने जवान खोते रहेंगे? कब तक शहीद हुए जवानों के बच्चे खून के आंसू रोते रहेंगे? आज चरमपंथ से केवल भारत पीड़ित नहीं है। यह एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन चुका है। इसे खत्म करने के लिए लोगों की मानसिकता बदलने की जरूरत है। उसे हम या तो हथियारों के बल पर बदलें या किसी और तरीके से। आतंकवाद को रोकने के लिए सरकार को पुलिस, सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों को और चुस्त-दुरुस्त करना चाहिए।
’देवेंद्रराज सुथार, जालोर, राजस्थान
यह कालिख
गौरी लंकेश की हत्या पर अनगिनत प्रतिक्रियाएं पढ़ लेने के बाद भी, मेरे अंदर का आम आदमी आहत का आहत ही रहा। कुछ लोगों ने उन्हें कट्टर ईसाई करार दिया है। कुछ लोगों के हिसाब से वे हिंदुत्व विरोधी थीं। मानहानि का दावा साबित हो गया था, जमानत पर रिहा थीं। कुछ लोगों ने उन्हें देशद्रोही भी साबित करने की कोशिश की है। कुछ लोगों का पुरुषवाद जागा और उन्होंने खूब अपनी औकात दिखाई। और भी बहुत कुछ!
ये सारी बातें सच मानते हुए मेरा एक सवाल है कि उस औरत ने इतनी बुराइयां होते हुए भी किसी की हत्या नहीं की और न ही कराई। तो फिर जिन लोगों ने गौरी लंकेश की हत्या की या कराई, उनका शमन और चरित्र दोहन करने के बजाय अंधभक्तों और जड़दिमाग लोगों ने इस हत्या को जायज ठहराना क्यों शुरू कर दिया?
उत्तर भी दिए देता हूं…कलम उठाकर विरोध करने के लिए बुद्धि चाहिए, तर्क चाहिए और इन सबसे ज्यादा संवेदना और धैर्य चाहिए। उसकी आवाज दबानी थी तो आप उसे गलत साबित करते, उस पर और दस मुकद्दमे करते लेकिन जब आपके पास कहने के लिए कुछ नहीं होता तब आप बल प्रयोग करते हैं और वही हुआ। दम था या है तो दिन के उजाले में अपना चेहरा दिखाते हुए गोली मारते। पर आपसे ये भी न हो सकेगा। जो कालिख गौरी लंकेश आपके मुंह पर पोत गई हैं, उसका रंग उनकी हत्या करने से और गाढ़ा हो गया है!
’अजय कुमार अजेय, करावल नगर, दिल्ली

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  1. J
    jindal aggarwal
    Sep 9, 2017 at 12:49 pm
    अजय कुमार अजेय जी आप तो बड़े अंतर्यामी निकले कि साबित कर दिया किसने हत्या की होगी , आज के बाद आपको ही बुलाया करेंगे जहाँ भी हत्या होगी, पुलिस और अदालत का समय क्यूँ व्यर्थ करना, आप हैं ना जो बिना जाँच किए अपनी शक्ति से क़ातिल के बारे में बता देते हैं, सचमुच काफ़ी महान व्यक्ति हैं आप, राहुल गांधी जी , रविश कुमार जी भी आपकी तरह महान हैं।
    (0)(0)
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    सबरंग