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समान वेतन

शीर्ष अदालत के इस निर्णय से देश में कार्य कर रहे लाखों संविदाकर्मियों में नई उम्मीद जगी है।
Author नई दिल्ली | November 7, 2016 05:13 am
भारतीय रुपया।

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल में दिए अपने फैसले में अस्थायी और संविदाकर्मियों के पक्ष में निर्णय सुनाया है, जिसके अनुसार इन्हें भी समान कार्य के लिए समान वेतन का हकदार माना है। इस फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार-1996 के अंतराष्ट्रीय समझौते के अनुच्छेद-7 का हवाला देते हुए कहा है कि समान कार्य के लिए समान वेतन हर नागरिक का हक है और कोई भी उसे इस हक से वंचित नहीं कर सकता।

पंजाब सरकार में कार्यरत संविदाकर्मियों की अपील पर फैसला देते हुए न्यायालय ने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन न देना अमानवीय, दमनकारी और शोषणकारी नीति है। अदालत के मुताबिक परिवार की भोजन, आश्रय और अन्य मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए नागरिकों को कम वेतन पर कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ता है और इसके लिए उन्हें अपने आत्म-सम्मान और गरिमा को भी दांव पर लगाना पड़ता है।

नियमित कर्मियों के बराबर कार्य करने के बावजूद संविदाकर्मियों को समान वेतन देने में आनाकानी करना या कठिन मापदंड बनाना गलत परंपरा है, जिसे बदलना आवश्यक है। संविदाकर्मियों की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य परियोजनाओं में कार्य कर रहे लाखों संविदाकर्मी वर्षों से लोगों को एड्स और टीबी जैसे भयानक रोगों से बचा रहे हैं, लेकिन दुख और हैरत की बात है कि इन्हें या इनके परिवारों को सरकार द्वारा कोई स्वास्थ्य सुरक्षा सुविधा नहीं दी जाती। नतीजतन, ये लोग कई तरह के संक्रमण का शिकार हो रहे हैं और अपना और अपने परिवार का उपचार कराने में भी लाचार हैं।

शीर्ष अदालत के इस निर्णय से देश में कार्य कर रहे लाखों संविदाकर्मियों में नई उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार को चाहिए कि राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए इन कर्मचारियों के लिए तुरंत नीति बनाए और इस फैसले को व्यवहार में लाए, जिससे संविदाकर्मियों के साथ हो रहे शोषणकारी और भेदभाव पूर्ण रवैए पर लगाम लग सके और वे भी एक सम्मानित जीवन जी सकें।
’अश्वनी राघव, उत्तमनगर, नई दिल्ली

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  1. V
    vijay kumar
    Nov 8, 2016 at 11:09 am
    इंडियन प्रीमिनिस्टर ko dill से लागु करना चाहhe ये वैरी good
    Reply
  2. V
    vijay kumar
    Nov 8, 2016 at 10:58 am
    वैरी गुड .....
    Reply
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