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चौपाल : जुबान पर लगाम

देश में आज उन्नीस किलोमीटर प्रतिदिन की दर से राजमार्ग बन रहे हैं। वित्तीय अनुशासन से राजकोषीय घाटा कम हो रहा है जो मनमोहन सिंह सरकार के समय काफी बढ़ गया था।
Author नई दिल्ली | June 13, 2016 01:42 am
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की फाइल फोटो।

देश में आज उन्नीस किलोमीटर प्रतिदिन की दर से राजमार्ग बन रहे हैं। वित्तीय अनुशासन से राजकोषीय घाटा कम हो रहा है जो मनमोहन सिंह सरकार के समय काफी बढ़ गया था। ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ से सरकार पैसों का ‘रिसाव’ रोकने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है, जिसके लिए कभी राजीव गांधी चिंतित रहते थे कि दिल्ली से भेजी कुल रकम का दस फीसद भी गरीबों तक नहीं पहुंच पाता। कालेधन को रोकने के लिए बहुत बड़ी न सही, मगर ठोस पहल जरूर हुई है। सर्राफा कारोबारियों पर एक फीसद कर लगा कर सरकार ने सुधारों के लिए अपने एक बड़े वोट बैंक को नाराज कर देने का जोखिम तक उठा लिया है।

कुल मिलाकर कहें तो दो साल में मोदी सरकार सही रास्ते पर चलती नजर आ रही है। विकास को प्राथमिकता देने वाले प्रधानमंत्री ने अपनी पार्टी के नेताओं द्वारा राम मंदिर पर न्यायालय की बात मानने की बात कहलवा दी है, तो पीडीपी से गठबंधन के बाद धारा 370 की समाप्ति के मुद्दे को भी फिलहाल किनारे कर दिया गया है। समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार कोई बहस कराने के मूड में नहीं दिख रही, तो आरक्षण को बनाए रखने पर भी अपनी स्पष्ट राय जाहिर कर चुकी है। कुल मिलाकर कहें तो विकास के पथ पर सबको साथ लेकर चलने और विवाद से बचते हुए अब तक बनी हुई व्यवस्था को कायम रखने में सरकार अपनी निष्ठा का परिचय दे चुकी है।

पर इस तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि कुछ लोग जो सत्ताधारी पार्टी के हैं, सरकार की दिशा भटकाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इसी कड़ी में ताजा बयान साध्वी प्राची का है, जो भारत को मुसलमान मुक्तबनाने पर जोर दे रही हैं। बिसाहड़ा कांड पर कुछ ही दिन पहले योगी आदित्यनाथ ने भी भड़काऊ टिप्पणी की थी। साध्वी निरंजन ज्योति तो पहले से अपनी जहरबुझी बातों के लिए काफी मशहूर हैं। उनके जहरीले बयानों के बाद भाजपा का रटा-रटाया जवाब आता है कि ‘यह पार्टी लाइन नहीं है’। मगर अब बात इतने से नहीं बनेगी। पार्टी को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर अपना मंसूबा साफ कर देना चाहिए वरना ‘सबका साथ, सबका विकास’ नारे के साथ आई पूर्ण बहुमत की स्थिर और मजबूत सरकार को इन्हीं कड़वे वचनों की भेंट चढ़ते देर नहीं लगेगी।

अंकित दूबे, जनेवि, दिल्ली

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