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बदलाव की खातिर

स्वच्छता अभियान के इतने बड़े स्तर पर प्रचार के बावजूद लोग अब भी सार्वजनिक स्थानों पर पॉलिथीन, रैपर, पानी की बोतलें आदि फेंक देते हैं, जो वास्तव में दुखद है।
Author July 5, 2017 04:18 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार से दो दिनों के गुजरात दौरे पर हैं। इस कड़ी में वह सबसे पहले वो अहमदाबाद के साबरमती आश्रम पहुंचे। जहां आश्रम के 100 साल पूरा होने के समारोह में हिस्सा लिया।

बदलाव की खातिर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी उस समय उन्हें बड़े पैमाने पर लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ था। तब लगा था कि संपूर्ण देश स्वच्छता के प्रति जागरूक है। लेकिन बीतते वक्त के साथ स्वच्छता के प्रति लोगों की जागरूकता भी कम होती नजर आ रही है। स्वच्छता अभियान के इतने बड़े स्तर पर प्रचार के बावजूद लोग अब भी सार्वजनिक स्थानों पर पॉलिथीन, रैपर, पानी की बोतलें आदि फेंक देते हैं, जो वास्तव में दुखद है।
हम हर प्रकार के विकास और बदलाव की आशा सरकार से ही रखते हैं और सोचते हैं कि यदि एक सरकार बदल देंगे तो दूसरी सरकार आकर बदलाव ले आएगी। सरकार देश को स्वच्छ बनाने और भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए कितने ही प्रयास क्यों न कर ले वह तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक हम व्यक्तिगत रूप से इन चीजों के प्रति जागरूक नहीं होंगे। देश में बदलाव लाने के लिए पहले हमें स्वयं में बदलाव लाना होगा।
’मृणालिनी शर्मा, कानपुर
बेतुकी बहस
इन दिनों चंद लोग केवल और केवल खुद को चर्चा में लाने के लिए ऐसे देशद्रोही और समाज-विरोधी जहरीले बयान दे देते हैं जिनका कोई आधार नहीं होता। हमारे खबरिया टीवी चैनल तुरंत बहस के लिए लोगों को बुला लेते हैं जैसे उन्हें ऐसे ही बयान की प्रतीक्षा थी। समझ नहीं आता ऐसा करके वे उनका या अपना प्रचार कर रहें या दुष्प्रचार? दो-तीन दिन बहस चलेगी और इन समाज विरोधी लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर नतीजा शून्य रहेगा। ऐसे भड़काने वाले लोगों की संख्या 125 भी नहीं लेकिन फिर भी वे अपनी आवाज बेतुकी बहस के कारण पूरे देश में फैला देते हैं। यदि बहस नहीं होती तो यह बात करोड़ लाख तो छोड़ों, हजार लोगों तक भी नहीं पहुंचती।
यह सच है कि ऐसे लोगों का विरोध न उनका राजनीतिक दल करता है, न उस धर्म के ठेकेदार और न संबंधित धर्म के लोग। बस इसी कमी के कारण इस तरह के लोग जहर घोलते रहते हैं। इसे केवल मीडिया रोक सकता है ऐसे लोगों को नजरअंदाज करके। बात बिगड़ती देख कर पूरी की पूरी बात रिकॉर्ड होने के बावजूद ऐसे लोग मीडिया को ही दोष दे देते हैं कि उसने उनकी बात को गलत तरह से दिखाया। नफरत की, वोटबैंक की राजनीति को रोकने के लिए मीडिया को निष्पक्ष रहते हुए जागना होगा। पारदर्शिता के नाम पर जहर का प्रचार उचित नहीं।
’यश वीर आर्य, देहरादून

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