December 11, 2016

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विवाद का पानी

जल न सिर्फ प्रशासनिक, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी विषय है और जीवन यापन के लिए सर्वाधिक आवश्यक।

Author November 30, 2016 02:18 am
तमिलनाडु को कावेरी नदी का जल दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ कर्नाटक के चिकमागलुर में मगादी के नजदीक एक सूखे झील में प्रदर्शन करते कन्नड़ सेना के कार्यकर्ता। (PTI Photo/21 Sep, 2016/File)

पंजाब और हरियाणा में सतलुज यमुना लिंक नहर पर ठनी हुई है। एक राज्य ने जहां अपने हिस्से की नहर का निर्माण कर लिया है, तो दूसरे ने अधिग्रहण की हुई जमीन वापस किसानों को सौंपने के प्रयास शुरू कर दिए। लेकिन क्या यह सब केवल राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए नहीं है? क्या नहर से दोनों राज्यों के किसानों को लाभ नहीं पहुंचता? संवैधानिक रूप से भी जल अगर राज्य का विषय है, तो अंतरराज्यीय जल विवाद केंद्र के। फिर भी क्या सभी अंतर-राज्य जल विवाद अलग-अलग हैं? केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली आदि अनेक राज्य जल विवाद के विषय से जुड़े हुए हैं।

जल न सिर्फ प्रशासनिक, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी विषय है और जीवन यापन के लिए सर्वाधिक आवश्यक। पुरातन काल से ही सिंधु, मुअनजोदड़ो, मेसोपोटामिया और अन्य सभी सभ्यताएं जल संसाधनों के किनारे ही विकसित हुर्इं। जल व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य से भी जुड़ा मुद्दा है। इसलिए जल के इस अंतर-राज्य विवादों के निपटारे के लिए सभी राज्यों को एक मंच पर आना होगा और निहित स्वार्थ त्यागने होंगे। इस सारे घमासान से सर्वाधिक हानि उस संवर्ग को हो रही है, जिन्हें शायद जल की सर्वाधिक आवश्यकता थी। जबकि गरीब किसान और विस्थापितों का ध्यान रखना, सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
’वीरेश्वर तोमर, हरिद्वार, उत्तराखंड

 

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First Published on November 30, 2016 2:18 am

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