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अगर शरीयत इतनी ही मंजूर है तो चोरों के हाथ क्यों नहीं काटते?

मुसलिम समाज के अंदर ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने तीन तलाक को खत्म करने के लिए मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा है।
Author May 16, 2017 04:34 am
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समेत पांच जजों की संविधान पीठ ने तीन तलाक पर सुनवाई की। (ग्राफिक्स- सी शशिकुमार)

श्रीलंका के साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चौदहवें वैशाख दिवस पर की गई श्रीलंका की यात्रा कई मायनों बेहद अहम है। भारत-श्रीलंका के संबंध शुरू से ही काफी मधुर रहे हैं। अलगाववादी संगठन लिट्टे से निपटने में भारत ने बहुआयामी सहयोगी की भूमिका अदा की थी। बीच में पूर्व राष्टÑपति राजपक्षे के समय कुछ समय के लिए इन संबंधों में खिंचाव आ गया था। राजपक्षे के कार्यकाल में श्रीलंका ने चीन से ज्यादा लगाव दिखाया था। हंबनटोटा बंदरगाह, कोलंबो पोर्ट सिटी जैसी परियोजना में चीन ने भारी निवेश किया था। इस समय चीन को लेकर श्रीलंका विशेष उत्साह नहीं दिखा रहा है क्योंकि चीन पर राष्टÑपति के चुनाव में राजपक्षे का सहयोग करने के आरोप लगे थे। साथ ही चीन द्वारा निवेश की आक्रामक नीति को लेकर भी वहां की कंपनियों में असंतोष है।

इस समय मैत्रीपाला सिरिसेना के नेतृत्व में श्रीलंका ने भारत से संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए विशेष रुचि दिखाई है। पिछले दिनों भारत द्वारा दक्षिण एशिया उपग्रह के प्रक्षेपण के माध्यम से अंतरिक्ष कूटनीति की शुरुआत की गई है। यह भारत द्वारा विदेश नीति के अहम पहलू ‘गुजराल डॉक्ट्रिन’ का एक सशक्त उदाहरण है जिसमें भारत के अपने पड़ोसी देशों से बगैर किसी अपेक्षा के सहयोग करने की बात कही गई थी। भारत को श्रीलंका से मछुआरों के प्रति एक पारदर्शी नीति लागू कराने पर भी जोर देना होगा। अक्सर तमिल मछुआरे श्रीलंका द्वारा पकड़ लिए या मार दिए जाते हैं। कचातिवु द्वीप 1976 में भारत ने श्रीलंका को दे दिया था और उस करार में भारत के मछुआरों को द्वीप के पास तक मछली मारने का हक दिया गया था। आपसी सहयोग से इस संवेदनशील मुद्दे पर भी सहमति बनानी होगी।

इस समय चीन भारत के प्रति स्ट्रिंग आॅफ पर्ल की नीति, वन बेल्ट वन रोड की नीति के अपना रहा है। इसमें भारत के पड़ोसी देशों में चीन द्वारा भारी मात्रा में निवेश किया जा रहा है। चूंकि भारत की आर्थिक स्थिति चीन से कमतर है ऐसे में भारत को ‘हार्ड पावर’ का जवाब ‘सॉफ्ट पावर’ की नीति से देना होगा।
’आशीष कुमार, उन्नाव, उत्तर प्रदेश
सुधार का समय

मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को बहुसंख्यक समुदाय के लोगों से भय रहता है कि वे उनके अधिकारों का हनन न कर लें। यही सोच बाद में विभाजन का कारण बनी। लेकिन आज समय बदल चुका है। हम एक ऐसे देश में रह रहे हैं जिसने विभिन्नता के बावजूद लोकतंत्र की मिसाल पेश की है। इस देश का दुर्भाग्य है कि यहां हर बात को धर्म से जोड़ कर देखा जाता है। तीन तलाक का विरोध इसी का नतीजा है। मुसलिम समुदाय के कुछ लोगों, खासकर मौलानाओं को लगता है कि अगर तीन तलाक खत्म कर दिया गया तो यह उनकी हार होगी। ऐसे लोगों को उन महिलाओं के बारे में सोचना चाहिए जिनकी जिंदगी तीन तलाक की वजह से बर्बाद हो रही है।

मुसलिम समाज के अंदर ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने तीन तलाक को खत्म करने के लिए मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा है। राही मासूम रजा ने कहा था कि अगर शरीयत इतनी ही मंजूर है तो चोरों के हाथ क्यों नहीं काटते? गौरतलब है कि पाकिस्तान समेत बीस देशों ने अपने यहां तीन तलाक की कुप्रथा खत्म कर दी है। फिर इसे भारत में इसेखत्म क्यों नहीं किया जा सकता?
’दिब्यांशू, कानपुर

पीड़िता के सिर की हड्डियां फ्रैक्चर, शरीर के अंदर से फूड पाइप गायब' '

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