December 10, 2016

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बर्बादी की फसल

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के टमाटर की खेती करने वाले किसान पशुओं को टमाटर खिलाने पर मजबूर।

Author November 9, 2016 06:08 am
प्रतिकात्मक तस्वीर।

पिछले दिनों एक कोने में छिपी एक खबर पर नजर पड़ी, लेकिन वह बेहद मर्मांतक थी। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के टमाटर की खेती करने वाले किसान पशुओं को टमाटर खिलाने पर मजबूर। वजह टमाटर की नई फसल की आवक से बाजार में टमाटर के दामों में आई बेतहाशा कमी। औने-पौने दामों में अपनी फसल बेचने के बजाय किसानों ने पशुओं को खिलाना उचित समझा। इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहा जाएगा कि बिचौलियों और व्यवस्था की नाकामी के चलते आजादी के सात दशकों बाद भी किसानों की दयनीय दशा से संबंधित ऐसी खबरें सुनने-पढ़ने को मिल जाती हैं। क्या वजह है कि किसानों को अपनी बेशकीमती फसलें इस कदर बेचने को विवश होना पड़ता है?

यह अत्यंत पीड़ादायी है कि उचित खरीदार न होने के चलते जहां किसानों को आलू, प्याज, टमाटर, दलहन जैसी फसलें नष्ट करने को मजबूर होना पड़ता है, वहीं बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों के हाथों में पहुंचते ही वही फसलें सोना बन जाती हैं। यह स्थिति केवल मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों की नहीं, बल्कि समूचे भारत के किसानों की है। कहीं किसानों को अपने फसलें नष्ट करने पर मजबूर होना पड़ता है तो कहीं गन्ने जैसी नगदी फसलों की कीमत कई-कई वर्ष तक न मिलने की वजह से किसानों को मुफलिसी के दौर से गुजरना पड़ता है। खाद, बीज, सिंचाई आदि महंगी होने के कारण लगातार घाटे का सौदा बनती खेती करते रहने को मजबूर किसानों को ही क्यों हर बार बलि का बकरा बनाया जाता है। कभी मिल मालिकों के हाथों, तो कहीं साहूकारों के हाथों, कहीं बिचौलियों के हाथों तो कहीं बेरहम प्रकृति के हाथों।

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हर बार चौतरफा मार किसान को ही झेलनी पड़ती है। देश भर के सभी कोनों से मुफलिसी के मारे किसानों की आत्महत्या करने की खबरें आती रहती हैं जो अन्य खबरों की तरह ही हमारे लिए आम हो चली हैं। लेकिन विचारणीय है कि आखिर कब तक हम किसानों की दुर्दशा और समस्याओं से आंखें मूंद कर बेपरवाह होते रहेंगे। अगर समय रहते व्यवस्थागत और नीतिगत कदम नहीं उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं जब किसानों का खेती जैसे घाटे के सौदे से मोहभंग होगा। उस दिन की कल्पना करना ही भयावह होगा।
’सुधीर तेवतिया, बागपत

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First Published on November 9, 2016 6:08 am

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