December 02, 2016

ताज़ा खबर

 

चौपाल: कामयाबी की कुंजी

जिसने असफलता को महूसस किया है, जो खुद को किनारे किए जाने को याद रखता है, वह अक्सर दूसरों की इज्जत और मदद ज्यादा करता है।

Author November 2, 2016 05:24 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

जीवन में विफलता, हमें सफलता से ज्यादा मिलती है। शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जिसने विफलता और तिरस्कार नहीं झेला हो। जिन्हें हम दुनिया के सफल व्यक्ति मानते हैं, उनकी कहानी भी खारिज किए जाने और नाकाम कोशिशों की बुनियाद पर खड़ी होती है। फिल्म उद्योग से लेकर प्रशासनिक सेवा में सफल रहे लोगों ने विफलता का सामना किया है। हमें जब भी कोई बड़ी निराशा होती है, तो हम सोचते हैं ऐसा हमारे ही साथ हुआ है। जबकि ऐसी बात नहीं है। अगर हम लोगों के जीवन में झांक कर देखें तो जो लोग ज्यादा खुश दिखते हैं, उनसे बात करके हमें पता चलेगा कि इस मुकाम तक आने के लिए उन्होंने कितने पापड़ बेले हैं! तो एक स्तर पर खारिज किया जना हमें और रचनात्मक होने, ऊर्जावान होने और बड़े कैनवास पर काम करने के लिए प्रेरित करता है।

जिसने असफलता को महूसस किया है, जो खुद को किनारे किए जाने को याद रखता है, वह अक्सर दूसरों की इज्जत और मदद ज्यादा करता है। दूसरों को अपना दुख बताने के बजाय उनकी बातें सुनता है, हौसला देता है कि सब ठीक हो जाएगा! हर एक चीज में कुछ सकारात्मक ढूंढ़ने से नकारात्मकता से बचा जा सकता है। अगर हम सफलता चाहते हैं तो इसे अपना लक्ष्य नहीं बनाएं, सिर्फ वह करें जो करना हमें अच्छा लगता है और जिसमें हमें विश्वास है। हमें सफलता मिलेगी।

आज के विद्यार्थियों को यह समझना होगा की सफलता अत्यधिक परिश्रम चाहती है और इंतजार करना बंद करना होगा, क्योंकि सही समय कभी नहीं आता है। खारिज किए जाने को स्वीकार करें, गले लगाएं, क्योंकि सफलता के शिखर पर भी कुछ कमी रह जाती है और एक असफलता जीवन को कुछ कदम आगे भी बढ़ा देती है। दुनिया में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं, जिन्होंने कुछ विफलताओं के बावजूद बुलंदियों को छुआ है। हम भी मुट्ठी तान के खड़े हो जाएं। दुनिया हमारा लोहा मानेगी। असफलता से लोग गंभीर निराशा में चले जाते हैं।

सफल लोगों की विफलता और किनारे किए जाने की कहानी दूसरों के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। एक ऐसे समय में जब कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी अपनी एक विफलता और असफल होने की अशंका मात्र से हताशा के शिकार हो रहे हैं, उनके शिक्षक उनके लिए प्रेरणा बन सकते हैं। आज समस्या यह भी है कि शिक्षक और विद्यार्थियों में वह प्यार की मिठास नहीं रही, जिनमें सम्मान, आदर और पढ़ाने का भाव था। किसी ने ठीक ही कहा है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, लहरों से जो डरे, वह नौका पार नहीं होती।
’संतोष कुमार, बाबा फरीद कॉलेज, बठिंडा

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 2, 2016 5:24 am

सबसे ज्‍यादा पढ़ी गईंं खबरें

सबरंग