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पाबंदी की पोशाक

राजस्थान के धौलपुर जिले में बल्दियापुर गांव के पंच-पटेलों ने लड़कियों के जींस व टॉप पहनने और मोबाइल रखने पर यह कह कर पाबंदी लगाई कि इससे मान-मर्यादाएं टूट रही हैं, संस्कार खत्म हो रहे हैं।
Author July 20, 2017 05:01 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

पाबंदी की पोशाक

पिछले दिनों राजस्थान के धौलपुर जिले में बल्दियापुर गांव के पंच-पटेलों ने लड़कियों के जींस व टॉप पहनने और मोबाइल रखने पर यह कह कर पाबंदी लगाई कि इससे मान-मर्यादाएं टूट रही हैं, संस्कार खत्म हो रहे हैं। लेकिन वहां की लड़कियों ने इस पाबंदी को मानने से इनकार कर दिया। वे जींस पहन कर ही घर से निकलीं। इतना ही नहीं, उन्होंने बिरादरी के पंच-पटेलों से सवाल किया कि हमारी पोशाक देखने की बजाय वे गांव के हाईस्कूल और अस्पताल के लिए काम क्यों नहीं करते? हमें पता है क्या पहनना है! हमारे गांव में पांचवीं से आगे पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं, अस्पताल नहीं, उन पर किसी पंच का ध्यान क्यों नहीं जाता; हमारे पहनावे और रहन-सहन को ही क्यों निशाना बनाया जाता है?  वाकई, मुझे इन लड़कियों में ‘वंडर वूमेन’ दिखी। वह वंडर वूमेन जो निर्भीक होकर समाज की दकियानूसी सोच को खुली चुनौती देकर उसका मर्दन करती है। जो हक के साथ अपनी आजादी का आकाश छीन लेती है। जिसकी आवाज समाज के ठेकेदार चाह कर भी दबा नहीं पाते। इन लड़कियों के आसमां को पैरों में झुका देने वाले हौसले को देखकर गर्व होता है। दूसरी ओर पंच पटेलों, खाप पंचायत और कट्टरवादी धार्मिक संगठनों द्वारा बार-बार लड़कियों के मनचाहे कपड़े पहनने पर बंदिशों के फरमान सुन कर बड़ा ही दुख होता है। उनकी दकियानूसी सोच क्यों नहीं बदलती? आखिर जींस-टॉप पहनने और मोबाइल रखने में हर्ज ही क्या है!

मैं तो चाहता हूं कि देश की हर लड़की जींस पहने और मोबाइल रखे। ठीक उसी तरह छेड़खानी करने वालों की ठुकाई करे और मोबाइल फोन से उसकी रिकॉर्डिंग भी करे। पहनावे से मर्यादाएं कभी नहीं टूटतीं और आज के तकनीकी युग में आप किसी को मोबाइल से भी दूर नहीं कर सकते। इसी तरह आप पुरुषों की खराब नीयत के कारण महिलाओं को घूंघट में नहीं रख सकते। जहां नजर और नजरिया बदलने की जरूरत है वहां केवल कपड़े बदलने से क्या काम चल जाएगा? छेड़छाड़, बलात्कार और महिला उत्पीड़न के लिए पोशाक नहीं बल्कि असामाजिक तत्त्वों का वहशीपन दोषी है। इक्कीसवीं सदी में आप लड़कियों को गुलामी की जंजीरों में जकड़ कर नहीं रख सकते। आज ऐसी सभी गलत धारणाओं को जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है न कि मनमाने प्रतिबंधों को जायज ठहरा कर उनकी वकालात करने की। इसके लिए राजस्थान की इन बहादुर लड़कियों की तरह आगे बढ़ कर अन्य लड़कियों को भी असंभव के विरुद्ध अपनी लड़ाई लड़नी होगी।
’देवेंद्रराज सुथार, जेएनवीयू, जोधपुर
मतदान में आधार
इन दिनों जब हर कार्य में आधार कार्ड को जरूरी बनाया जा रहा है तो मतदान में भी आधार कार्ड को अनिवार्य बना कर उसे ईवीएम से भी जोड़ दिया जाए। ऐसा होने से हमारा लोकतंत्र मजबूत होगा। इसके साथ ही हर किसी के लिए मतदान अनिवार्य हो चाहे कोई नोटा का ही प्रयोग क्यों न करे, लेकिन मतदान अवश्य करे। आधार कार्ड से ईवीएम जुड़ जाने पर फर्जी वोट और फर्जी वोटर का झमेला भी उत्पन्न नहीं होगा क्योंकि अंगूठे की छापके मिलान के बाद ही वोट मान्य होगा। सरकार और चुनाव आयोग को इस बाबत सकारात्मक निर्णय लेकर देश के लोकतंत्र को और सुदृढ़ बनाना चाहिए।
’मिथिलेश कुमार, बलुआचक, भागलपुर

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