June 29, 2017

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शहीदों की सुध, चोर दरवाजे

फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने हाल ही में एक वेब पोर्टल जारी किया, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति शहीद हुए जवानों के परिवार वालों की मदद कर सकता है।

Author April 13, 2017 05:54 am
बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार ने रविवार रात भारत के वीर मोबाइल एप और वेब पोर्टल लॉन्च किया। इस तकनीक की मदद से केंद्रीय आर्म्ड पुलिस फोर्स और केंद्रीय पैरा मिलिट्री फोर्सेस की आर्थिक तौर पर मदद की जा सकेगी।

शहीदों की सुध
फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने हाल ही में एक वेब पोर्टल जारी किया, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति शहीद हुए जवानों के परिवार वालों की मदद कर सकता है। इस पोर्टल में तकरीबन 83 शहीद जवानों को शामिल किया है, जिसमें उनकी शहादत की पूरी जानकारी है और उनके परिवार के बैंक अकाउंट के बारे में उल्लेख है जिससे कोई भी व्यक्ति इन शहीदों के परिवार को आर्थिक सहायता दे सकता है। इस पोर्टल का नाम ‘भारत के वीर’ है।
यह बहुत सराहनीय प्रयास है। इससे पहले भी अक्षय कुमार किसानों की मदद के लिए आगे आए हैं। यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि हमारे किसान और जवान आज सबसे बुरी हालत में हैं। देश में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। तमिलनाडु के किसान लगभग एक महीने से जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं पर कोई उनकी सुध लेने वाला ही नहीं है। हां, जिन्हें अपनी राजनीतिक रोटियां सेकनी हैं वे फोटो खिंचवाने जरूर वहां पहुंच जाते हैं।
देश के जवान सीमा पर हमारी रक्षा के लिए दिन-रात मुस्तैद रहते हैं। कई बार उनके पास ढंग का भोजन भी नहीं होता, फिर भी उनका हौसला देखिये कि अपने कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटते। यही जवान जब शहीद होते हैं तो पांच या दस लाख रुपए देकर उनके परिवार को सांत्वना दी जाती है। उसके बाद परिवार की क्या दुर्दशा है इससे किसी को कोई नाता नहीं रहता। ऐसे में यह पोर्टल आम भारतवासियों के लिए एक मौका है कि उन परिवारों की मदद कर सकेंजिनका बेटा हमारे देश की रक्षा के लिए शहीद हुआ है। उम्मीद है, लोग इस अच्छी पहल में जरूर भागीदार बनेंगे।
’शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल, तेलंगाना

चोर दरवाजे
देश में चोरी की बढ़ती वारदातें सोचने को मजबूर करती हैं कि क्या इसकी वजह अशिक्षित होना और आलस्य है? तमाम लोग कहते मिल जाएंगे कि जब देश में बच्चों की पढ़ाई ठीक से नहीं होगी तो वे चोरी-डकैती ही करेंगे! लेकिन इसका प्रतितर्क है कि हमारे देश के श्रमिक तो पढ़ाई नहीं करते, फिर भी वे अपनी मेहनत से कमाते और खाते हैं। चोरी करना अच्छी बात नहीं है, यह हमें बचपन से ही सिखाया जाता है। इसके साथ हमें श्रमनिष्ठा और सदाचार जैसे मूल्यों का भी बीजारोपण करना होगा तभी चोरी जैसी बुराई और चोर दरवाजों से सफलता के शार्टकट तलाशने की कोशिशों पर विराम लग सकेगा। युवा हमारा भविष्य हैं और हम ही उन्हें अच्छी शिक्षा नहीं देते। ऐसे में खुद ही सोचिए, घर चलने के लिए वे कैसे रास्ते निकालेंगे?
’तनु चतुर्वेदी, जिम्स, कानपुर

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First Published on April 13, 2017 5:54 am

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