December 08, 2016

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चौपाल: सियासी अनदेखी

जहां एक ओर सरकार गंगा और यमुना शुद्धिकरण का ढोल पीटती है, वहीं ऐसे जुलूसों और आयोजनों को बढ़ावा देकर इन्हें गंदा बनाए रखने में अपनी अप्रत्यक्ष भूमिका निभाती है।

Author November 21, 2016 03:16 am
यमुना नदी

अंजलि सिन्हा का आलेख ‘आस्था के आगे’ (18 नवंबर, दुनिया मेरे आगे) बेहद जायज सवाल उठाता है। आखिर क्यों हम किसी भी समुदाय के धार्मिक उन्माद के चलते अपनी जान जोखिम में डालने को विवश हैं? क्यों कोई भी सरकार धार्मिक जुलूसों पर शिकंजा कसने को तैयार नहीं है? जहां एक ओर सरकार गंगा और यमुना शुद्धिकरण का ढोल पीटती है, वहीं ऐसे जुलूसों और आयोजनों को बढ़ावा देकर इन्हें गंदा बनाए रखने में अपनी अप्रत्यक्ष भूमिका निभाती है। वही सवाल कि आखिर कब तक सरकारें अपने राजनीतिक फायदे के चलते लोगों की जान आफत में डालती रहेंगी? इस पर विचार होना चाहिए।
’कन्हैया जादौन, जामिया मिल्लिया, दिल्ली

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First Published on November 21, 2016 3:14 am

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