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बदहाल बुजुर्ग

इस महिला का बेटा बीवी-बच्चों सहित अमेरिका में रहता है और लगभग सवा साल से मां के संपर्क में नहीं था। जब वह मुुंबई आया तो उसे अपने फ्लैट में मां का कंकाल बिस्तर पर मिला।
Author August 10, 2017 05:50 am
प्रतीकात्मक चित्र।

बदहाल बुजुर्ग
मुंबई के एक फ्लैट में 63 साल की बुजुर्ग महिला का कंकाल मिला। इस मामले ने एक बार फिर हमारे समाज में बुजुर्गों की बदहाली से परदा उठा दिया है। इस महिला का बेटा बीवी-बच्चों सहित अमेरिका में रहता है और लगभग सवा साल से मां के संपर्क में नहीं था। जब वह मुुंबई आया तो उसे अपने फ्लैट में मां का कंकाल बिस्तर पर मिला। बुजुर्ग महिला अकेलेपन की वजह से भारी अवसाद से ग्रस्त थी जिसके कारण वह समाज से अलग-थलग हो गई और खाना-पीना भी छोड़ दिया था।
अफसोस की बात है कि महिला के बेटे तक ने मां की सुध नहीं ली। पति के दुनिया से चले जाने के बाद उस महिला का सहारा सिर्फ उसका बेटा था जो अपनी मां को छोड़ अमेरिका में ही बस गया। सजा का हकदार बेटा भी है जिसने समय रहते बुजुर्ग मां का खयाल नहीं रखा और उसे अकेली छोड़ दिया। ऐसे लोगों को कड़ी सजा देनी चाहिए जो बूढ़े माता-पिता को बोझ समझ कर उनसे दूर रहते हैं। क्या उन्हें यह नहीं पता कि एक दिन वे खुद भी बूढ़े होंगे?
’शालिनी नेगी, जैतपुर, बदरपुर, नई दिल्ली
कुछ नहीं बदला

सन 2012 के बहुचर्चित निर्भया कांड से सड़कों पर जबरदस्त उबाल आ गया था। उसके बाद कानून भी बदला, लेकिन जमीन पर कहीं कुछ नहीं बदला। ‘बहुत हुए अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार’ सरीखे भिन्न-भिन्न नारे गढ़ कर नरेंद्र मोदी केंद्र की सत्ता में तो विराजे ही, उनकी पार्टी अनेक राज्यों में सत्ता पर काबिज हो गई मगर अत्याचार दूर होने तो दूर की बात रहे, उन्हें अंजाम देने वाले भी उन्हीं के कर्ताधर्ता हैं। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उलटे पीड़ितों पर लांछन मढ़े जा रहे हैं। गुजरात से भाजपा के एक सांसद पर बलात्कार के आरोप में कार्रवाई के बजाय आरोप लगाने वाली महिला को ही नई परिभाषा ‘हनी ट्रैप’ की दोषी से प्रचारित कर दिया गया। इसी कड़ी में अब चंड़ीगढ़ में हरियाणा भाजपा अध्यक्ष के बेटे की करतूत सोशल मीडिया के जरिए पूरे देश के सामने आ चुकी है।

पीड़ित का यह कहना अत्यंत विचारणीय है कि अगर समय पर पुलिस नहीं आ जाती और वह किसी आईएएस अफसर की बेटी के बजाय किसी साधारण परिवार से होती तो उसे भी कहीं बलात्कार के बाद मार कर फेंक दिया होता। बावजूद इसके जिस आरोपी को खुद पुलिस ने मौका-ए-वारदात पर पकड़ा, उसे जमानत पर छोड़ दिया गया। मीडिया के पूछे जाने पर कि क्यों छोड़ दिया गया, कहा जा रहा है कि सीसीटीवी से तथ्य जुटाए जा रहे हैं। यही तो है ‘समरथ को नहिं दोष गोसार्इं’। जब बड़े नौकरशाह भी राजसत्ता के सूत्रधारों के सामने बौने हो जाएं, वहां गरीब की कहां होनी है कोई सुनवाई!
’रामचंद्र शर्मा, तरुछाया नगर, जयपुर

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