December 05, 2016

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चौपाल: आगे की राह

जिन भ्रष्ट-बेईमान-मिलावटखोर-मुनाफाखोर-पूंजीपतियों ने गरीबों-मेहनतकशों का खून चूस कर अपने महल खड़े कर लिए, उनकी नींद इससे हराम होगी।

Author November 15, 2016 03:28 am
चार घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद शोएब को दोपहर 3 बजे पैसे मिल गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच सौ और एक हजार रुपए के मौजूदा नोट बंद करने की घोषणा से महानगरों से लेकर गांवों तक की अमीर-गरीब जनता हतप्रभ और सन्न रह गई। गरीबों के सामने जहां तात्कालिक तौर पर कई तरह की परेशानियां खड़ी हो गर्इं वहीं अमीरों के माथे पर बल पड़ गए कि अब उनकी काली कमाई कैसे सफेद होगी। कुल मिलाकर मोदी का यह धमाका किसी सर्जिकल स्ट्राइक से कम नहीं है और इसका पूंजी व्यवसाय पर व्यापक असर पड़ेगा। मोदी आम चुनाव से पहले ही काले धन पर लगाम को अपना प्रमुख मुद्दा बनाए हुए थे। हालांकि विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन वापस लाने में वे सफल नहीं हो पाए लेकिन भारत के अमीरों के पास मौजूद काले धन को बाहर लाने अथवा उसे रद्दी बनाने की दिशा में निश्चय ही उन्होंने लीक से हट कर सख्त निर्णय लेने की साहसिक पहल की है।

बड़े नोट बंद करके एक तीर से उन्होंने कई शिकार कर दिए। जिन भ्रष्ट-बेईमान-मिलावटखोर-मुनाफाखोर-पूंजीपतियों ने गरीबों-मेहनतकशों का खून चूस कर अपने महल खड़े कर लिए, उनकी नींद इससे हराम होगी। दलाली-कमीशन-रिश्वत के बूते जो लोग कुछ ही वर्षों में अमीर हो गए, सफेदपोश और ऊंची कॉलर वाले जिन्होंने लूट-कबड्डी मचा कर दो नंबर की रकम का जखीरा जमा कर लिया, उन सबकी अब नींद उड़ चुकी है। दूसरी तरफ भारी मात्रा में नकली नोट भारत में लाकर जो राष्ट्र विरोधी ताकतें खतरनाक मंसूबे पाल रही थीं, उन पर भी एक झटके में पानी फिर गया है। आतंकवाद को पनाह देने वालों को भी इससे तगड़ा झटका लगेगा।

लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि 500-1000 के नोटों का प्रचलन अचानक बंद करने से देश के अधिकांश आम जन को बहुत परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बीमारियों से त्रस्त करोड़ों लोगों के लिए अब एक नया सिरदर्द पैदा हो गया है। खासकर जिन परिवारों में शादी-ब्याह है, जो लोग यात्राओं पर हैं, अस्पतालों में भर्ती हैं, उन सबके लिए नए नोटों का तत्काल प्रबंध करना मौजूदा हालात में बहुत टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। मुट्ठी भर काले धन वाले और नकली नोट के तस्करों की कारगुजारी का दंड पूरे देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। इसलिए अफरा-तफरी के इस जबरदस्त माहौल में सरकार को जितना जल्द हो, सुविधापूर्वक तरीके से आम आदमी को नए नोट मुहैया कराने की पहल करने के साथ उसकी प्रभावी देखरेख भी करानी चाहिए ताकि जो-जो कमियां व परेशानियां सामने आ रही हैं, उनका तुरंत समाधान हो सके।

देश की जनता इस बात की कभी विरोधी नहीं रही कि काला धन बाहर नहीं आए। संपूर्ण अवाम हमेशा यह चाहता रहा है कि काला धन जुटाने वालों पर सख्ती से अंकुश लगे। उनकी लूट-खसोट और खून चूसने की दुष्प्रवृत्ति बंद हो। उन्हें ऐसी कठोर सजा मिले जिससे अन्य बेईमान व भ्रष्ट लोगों में खौफ पैदा हो और उन्हें सबक मिले। जो सफेदपोश नेता, मंत्री-अफसर आदि लूट-लूट कर अपना घर भर रहे हैं और चुनावों के दौरान पानी की तरह धन वर्षा करने से नहीं चूकते, उन पर तगड़ी नकेल लगे। इस दिशा में अभी और परिपक्व फैसले लेने व कदम उठाने होंगे ताकि गरीबी-अमीरी का भेद रेखा कम या खत्म हो सके।
’ओमप्रकाश गुप्ता, अलवर

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First Published on November 15, 2016 3:28 am

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