December 08, 2016

ताज़ा खबर

 

चौपाल: मुद्दों से परहेज

तीन तलाक का मुद्दा इतना गरमाता गया था कि लगता था, इस बार जरूर कुछ होगा लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक की खबर के आगे हम सब कुछ भूल गए।

Author November 22, 2016 06:58 am
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो तीन तलाक के पक्ष में नहीं है। (एपी फाइल फोटो)

क्या खबर दबती है या जानबूझ कर दबाई जाती है? आखिर क्यों ऐसा होता है कि एक बड़ी खबर कई अहम छोटी खबरों को दबा देती है? उनतीस सितंबर को नियंत्रण रेखा के पार पाक अधिकृत कश्मीर में ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ हुई कि वह उस वक्त की सब चर्चित खबरों को खा गई। देश में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे हैं यह एक बड़ी खबर थी। भारत व्यापार करने में सबसे पीछे रहने वाले देशों में से एक है, तीन तलाक का मुद्दा इतना गरमाता गया था कि लगता था, इस बार जरूर कुछ होगा लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक की खबर के आगे हम सब कुछ भूल गए।

इसके बाद आठ नवंबरकी रात नोटबंदी की ऐसी खबर आई कि उसने हमें सब भुला दिया। लोगबाग सब कुछ भूल कर अगले दिन एटीएम और बैंकों के बाहर लाइन में खड़े मिले। हम भूल ही गए कि दिल्ली में कितना भयंकर प्रदूषण था, नजीब गायब हुआ था, एक पूर्व सैनिक ने आत्महत्या कर ली थी जिसे लेकर देश में बड़ी चिंता थी। अब हमें अगर कुछ याद है तो वह है 500 /1000 के नोट। मीडिया को भी बस वही याद रहा!अब क्या करें? आप सब भूल जाते हैं या आपको भुला दिया जाता है? क्यों आप नहीं सोचते कि जब देश गंभीर होकर किसी मुद्दे पर कुछ सोचता है तो सरकार कुछ ऐसा कर देती है कि आप सब कुछ भूल कर उसी को याद करते हैं। क्या सरकार नहीं चाहती कि आप कुछ सोचें-समझें? क्या आपका नादान-अनजान बने रहना या मुद्दों में उलझे रहना ही सरकार के लिए सबसे फायदेमंद है?मुद्दे दबते हैं या दबाए जाते हैं, यह विचारणीय प्रश्न है। आखिर मुद्दों से इतना खौफ या परहेज क्यों?
’अभय, जामिया, नई दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 22, 2016 5:23 am

सबरंग