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शक होता है

इस गति से तो मौसम भी नहीं बदलता। दिन बदला नहीं कि नया नियम।
Author December 26, 2016 03:09 am
दो हजार रुपये के नोट।

इस गति से तो मौसम भी नहीं बदलता। दिन बदला नहीं कि नया नियम। पांच हजार से संबंधित नया नियम आया और अगले दिन ही वापस ले लिया गया। इस खेल में परेशान हैं निम्न-मध्यवर्गीय लोग, जो दिन में नौकरी की जगह बैंकों की लाइन में इस उम्मीद से लगते हैं कि आज कुछ रुपए मिल जाएंगे तो खरीदारी कर लेंगे। नवंबर माह की मासिक देनदारी बाकी है तो दिसंबर की आवश्यक खरीदारी भी। बाहर रह रहे विद्यार्थियों को परीक्षाओं के बीच एटीएम की लाइन में दिन गुजारना पड़ रहा है। पर क्या किसी ने किसी बड़े सफेदपोश को कहीं लाइन में लगे देखा? बैंक मैनेजर हमेशा दो-चार लोगों से घिरा रहता है। जब काले धन को सफेद बनाने के करोड़ों रुपए के मामले में मैनेजर पकड़े जाते हैं तो शक होता ही है। जब लाइन में लगी जनता को कह दिया जाता है कि पैसा खत्म हो गया, फिर भी एक सूट-बूट वाला व्यक्ति मुस्कराते हुए निकल कर गाड़ी में बैठ कर चला जाता है तो शक होता है। अब सरकार और कितने नियम बनाएगी और बदलेगी?
’वीरेश्वर तोमर, हरिद्वार

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