December 10, 2016

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चौपाल: मयकशी पर शिकंजा

आए दिन कितनी ही वारदातें या दुर्घटनाएं शराब के नशे के कारण हो रही हैं यह आमजन और पुलिस के रिकार्ड भी बता सकते हैं।

Author नई दिल्ली | November 1, 2016 05:46 am
बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी है। (फाइल फोटो)

पंजाब के चुनावी युद्ध में पूरी तरह मशगूल आम आदमी पार्टी के नेताओं नींद बीच-बीच में कुछ टूट-सी जाती है कि आखिर दिल्ली में तो हमारी ही सरकार है! पिछले सालभर से पंजाब को नशामुक्त बनाने का भावुक ढिंढोरा वहां की गलियों में पीटा जा रहा है और उसी बीच एक दिन अचानक केजरीजी की निंद्रा टूटी कि अरे, मैं खुद दिल्ली का सीएम हूं तो क्यों न दिल्ली में नशे के खिलाफ कुछ शोर-शराबा मचाया जाए जिसका सीधा असर अवश्य पंजाब पर पड़ेगा! इसके बाद तुरंत ही सिसोदियाजी ने दिल्ली में घोषणा कर दी कि अवैध शराब बेचने, खुलेआम शराब पीने और पीकर हंगामा करने वालों पर भारी जुर्माना लगेगा और जेल भेजा जाएगा। लगता है, गलती से पंजाब का तीर दिल्ली पर चल गया है। अगर इस कदम को विशुद्ध चुनावी राजनीतिक हथकंडों से परे समझा जाए तो यह चाहे देर से ही उठाया जा रहा हो पर काबिले तारिफ है!

आज दिल्ली में होटलों, ढाबों, पार्कों से लेकर चाय-पान के खोखों तक पर सरेआम शराबखोरी हो रही है। आए दिन कितनी ही वारदातें या दुर्घटनाएं शराब के नशे के कारण हो रही हैं यह आमजन और पुलिस के रिकार्ड भी बता सकते हैं। वैसे अगर वास्तव में केजरीवाल सरकार दिल्ली को नशा मुक्त करने का खिताब जीतने की इच्छा रखती है तो उसे यहां के तमाम ठेके बंद कर पूर्ण शराबबंदी लागू कर देनी चाहिए। इसमें संभवत: मोदी सरकार और ‘जंग’ साहब भी जंग वाले मोड से हटकर सहयोग वाले मोड पर आ सकते हैं!

सार्वजनिक स्थलों पर मयकशी का आलम तो यह है कि मंगलापुरी फेज-दो में पाकेट-21 नसीरपुर द्वारका नामक पार्क में शराबखोरों के टोले दिन दहाड़े ही ढक्कन खोले बैठे रहते हैं! गर्मी हो या सर्दी, एक-दो नशेड़ी-गंजेड़ी रात में भी यहीं पड़े रहते हैं। पार्क के ठीक सामने ठेका है जहां शाम चार-पांच बजे के बाद मेला-सा भर जाता है और नसीरपुर रोड जाम हो जाता है सो अलग। यह पार्क पूर्णत: शराब, ताश, जुए आदि का अड्डा बना हुआ है। किसी बहन-बेटी की हिम्मत नहीं पड़ती कि पार्क में सुबह या शाम को टहलने चली जाए। छोटे-छोटे बच्चे पार्क में खेलते हैं। उन पर क्या असर पड़ता होगा, यह सब समझ सकते हैं। यहां के विधायक भी नजदीक ही रहते हैं पर उन्हें क्या लेना-देना लोगों की मुश्किलों से? अब नई घोषणा में जुर्माने की बात आई है तो इरादतन पुलिस जरूर कुछ सक्रिय होगी क्योंकि उसे कमाई का एक और जरिया जो मिल गया है। इस बात से कौन इंकार करेगा कि जो मजदूर अपना खून-पसीना बहा कर दिनभर में पांच सौ रुपए कमा कर शाम को सौ रुपए की दारूपीकर बाकीचार सौ रुपए अपने बच्चों के लिए घर ले जाता था अब वे चार सौ रुपए पुलिस वालों की जेबों का तापमान नहीं बढ़ाएंगे!
’मुकेश कुमार, महावीर एन्कलेव, दिल्ली

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First Published on November 1, 2016 5:46 am

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