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कितने कश्मीर

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने राज्य का एक अलग झंडा बनाने का सुझाव देने के लिए समिति का गठन किया है।
Author August 9, 2017 05:46 am
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया।

चोटी की पहुंच
भारत में चोटी कटने की अफवाह का ‘टॉप ट्रेंड’ करना उसके विकसित मुल्क बनने की राह का एक बड़ा रोड़ा लगता है। कैसी विडंबना है कि यहां खुले में शौच नहीं करने का संदेश फैलाने के लिए तो करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं मगर चोटी कटने का भय बिना एक भी धेला खर्च किए जन-जन तक पहुंच कर ‘टॉप ट्रेंड’ कर रहा है! अनपढ़ से लेकर पढ़े-लिखे तक, सब इसी की चर्चा में व्यस्त हैं। गीतकार गाने बजा रहे हैं, टीवी पर कार्यक्रम आ रहा है। इसी मुद्दे पर संपादकीय तक लिखे जा रहे हैं, तरह-तरह के मजाक, फोटो, आॅडियो क्लिप बन रहे हैं। तकरीबन हर व्यक्ति इस अफवाह की जद में है और कोई खंडन तो कोई मंडन करने में लगा है। ऐसी अफवाहें अक्सर ध्यानाकर्षण या ध्यान भटकाने के लिए फैलाई जाती हैं। राजस्थान के नागौर से फैली यह अफवाह आनंदपाल के एनकाउंटर पर घिरी राज्य सरकार को कुछ राहत दे गई है।

लोग आनंदपाल के मुद्दे को भूल कर ‘चोटी’ बचाने में लग गए! सरकार बचाओ, गाय बचाओ, लोकतंत्र बचाओ के सभी नारों पर ‘चोटी बचाओ’ का नारा भारी पड़ रहा है! सरकारों को चाहिए कि अफवाहें फैलाने वाले नेटवर्क और तौर-तरीकों पर रिसर्च कराएं ताकि उन्हें अपनी योजनाओं को जन-जन में फैलाने की मदद मिले। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी यदि कोई जन कल्याणकारी संदेश आम जन तक नहीं पहुंचता तो यह बड़ी गंभीर बात है जबकि बिना पैसे खर्च किए यह अफवाह हर घर, हर आदमी तक पहुंची है। एक और बात समझ आती है कि हमारे समाज को अफवाह में फंसाया जा सकता है। जिसमें अफवाह फैलाने का हुनर है वह आज कामयाब है। लेकिन इस कामयाबी की उम्र अधिक नहीं होती क्योंकि अफवाह का गुब्बारा कभी न कभी फूटता जरूर है और उसी दिन कामयाबी का षड्यंत्र भी नष्ट हो जाता है। लिहाजा, अफवाह फैलाने से मिलने वाली कामयाबी और अफवाह से दूर रहना चाहिए।
’घनश्याम यादव, बहरोड, अलवर
कितने कश्मीर
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने राज्य का एक अलग झंडा बनाने का सुझाव देने के लिए समिति का गठन किया है। इससे साफ है कि कांग्रेस कर्नाटक को भी कश्मीर की राह पर ले जाना चाह रही है। अलग राज्य के लिए अलग झंडे की सियासत शुरू हो चुकी है। कश्मीर की गलती को दोहराने की कांग्रेसी चाल से सवाल पैदा हो गया है कि आखिर वह देश में कितने कश्मीर चाह रही है? यह एक ऐतिहासिक भूल होगी जब देश में अभी के दो झंडों (एक कश्मीर) के अलावा तीसरा झंडा होगा जो देश की एकता के लिए खतरा पैदा करने वाला होगा। यह 1947 से पूर्व वाली स्थिति में लौटने जैसा होगा जब देश में 500 से भी ज्यादा रियासतें थीं और हर रियासत का अलग ध्वज होता था। आजादी के बाद इन सभी रियासतों का भारत में विलय कर उन्हें एक तिरंगे के तहत लाया गया था।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री की दलील है कि संविधान में कहां लिखा है कि राज्यों का अलग झंडा नहीं हो सकता? महात्मा गांधी ने कहा था कि एक देश की पहचान उसका झंडा ही होता है जिसके मान के लिए देशवासी मर मिटने को तैयार रहते हैं। एक और अलग झंडे की मानसिकता कांग्रेस की विखंडनवादी सोच की परिचायक है। ऐसा करके वह अपने ही आदर्शों के विरुद्ध जा रही है, जो चुनाव में जीत की गारंटी भी हरगिज नहीं है। क्या राष्ट्रीय राजनीति में भौतिक हार के बाद कांग्रेस नैतिक रूप से भी हार स्वीकारने जा रही है?
’देवेंद्रराज सुथार, जोधपुर

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