May 24, 2017

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निर्भया को न्याय

फ्रांस के संकेत फ्रांस में मैक्रोन की राष्ट्रपति के तौर पर जीत विश्व के लिए कई मायनों में अहम है। उन्होंने ला पेन को हराया जो प्रबल राष्टÑवाद, संरक्षणवाद की हिमायती थीं। इस तरह यूरोप की एकता की जीत हुई है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने और ट्रम्प की जीत के बाद विश्व […]

Author May 10, 2017 05:31 am
निर्भया गैंग रेप केस: इस केस में कुल छह लोग दोषी थे।

फ्रांस के संकेत
फ्रांस में मैक्रोन की राष्ट्रपति के तौर पर जीत विश्व के लिए कई मायनों में अहम है। उन्होंने ला पेन को हराया जो प्रबल राष्टÑवाद, संरक्षणवाद की हिमायती थीं। इस तरह यूरोप की एकता की जीत हुई है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने और ट्रम्प की जीत के बाद विश्व में एक अलग तरह का माहौल दिखने लगा था। यूरोपीय संघ में शरणार्थी का मुद्दा गरमाया तो रोजगार को लेकर सभी देशों में प्रबल राष्टÑवाद का उभार हुआ है जिसमें सब अपनी सीमा विश्व के लिए बंद करने का दबाव बना रहे हैं। असल में यह वैश्वीकरण के पीछे हटने जैसा था।
अगर ऐसा होता तो भारत जैसे विकाशसील देशों के लिए काफी मुश्किल भरा होता क्योंकि इन देशों में एक बड़ा बाजार बंद हो जाता। आशा की जा सकती है कि अब विश्व में बदलाव आएगा। यह देखना रोचक होगा कि जर्मनी में मर्केल की जीत होती है या नहीं।
’आशीष कुमार, नई दिल्ली
निर्भया को न्याय
आखिरकार पांच मई को निर्भया ही नहीं, पूरे देश को न्याय मिला। सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की मृत्युदंड की सजा बरकरार रखी और स्पष्ट कर दिया कि ऐसा जघन्य अपराध करने वालों को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती।
लेकिन प्रश्न है कि क्या महज एक निर्भया को न्याय दिलाने से इस तरह के अपराधों को रोका जा सकता है? न जाने कितनी ही निर्भयाएं अभी भी इंसाफ के इंतजार में हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें आशा की किरण अवश्य दिखाई दी है कि देर से ही सही, उन्हें भी इंसाफ मिलेगा। लेकिन हमारा ध्येय देश की बेटियों को न्याय दिलाने के साथ ही ऐसे समाज का निर्माण करना भी है जहां बेटियां घर से निकलते वक्त सुरक्षित महसूस करें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे यह संदेश भी छुपा था कि इस तरह का अपराध करने वालों का समाज में कोई स्थान नहीं है, और यदि कोई ऐसा अपराध करता है, तो उसका भी यही अंजाम होगा।
’मृणालिनी शर्मा, जिम्स, कानपुर
अभियान का असर
सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिए एक उचित निर्णय लिया है। देश के 434 शहरों और नगरों में कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के बाद सरकार ने स्वच्छ भारत की रैंकिंग जारी की जिसमें मध्यप्रदेश का इंदौर शहर पहले और भोपाल दूसरे नंबर पर रहा। इस सर्वे में 83 प्रतिशत से अधिक लोगों ने माना था कि स्वच्छ भारत अभियान चलाए जाने से उनका क्षेत्र पिछले एक वर्ष की तुलना में अधिक स्वच्छ हुआ है।
सर्वे में कहा गया कि 404 शहरों और कस्बों के 75 फीसद आवासीय क्षेत्र में अधिक स्वच्छता देखने को मिली है और इसके साथ ही 185 शहरों में रेलवे स्टेशन के आसपास का पूरा इलाका स्वच्छ बताया गया। इससे हर नागरिक बहुत खुश है और सरकार के अहम प्रयास से देश में स्वच्छता दिखने लगी है।
’राहुल उपाध्याय, बलिया, उत्तर प्रदेश

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First Published on May 10, 2017 5:22 am

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