December 08, 2016

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चौपाल: मामूली मुद्दे

जेएनयू के निरालेपन को बनाए रखने के लिए इन छोटे लगने वाले मुद्दों पर काम होना चाहिए। केवल कश्मीर की आजादी और भारत माता की जय से काम नहीं बनने वाला।

Author November 21, 2016 03:24 am
जेएनयू छात्र नजीब अहमद के लापता होने के विरोध में प्रदर्शन करते पटना में एआईएसएफ के कार्यकर्ता। (PTI Photo/4 Nov, 2016)

छात्रावासों में लगे पाम ट्री के पत्तों पर ब्रश करके थूके गए टूथपेस्ट के धब्बे। परिसर के ढाबों के पास यत्र-तत्र खाकर फेंके गए जूठे प्लेटों की सड़न से पैदा हुई दुर्गंध। जेआरएफ पाने वाले विद्यार्थियों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर मोटरसाइकिल खरीदना। परिसर के भीतर के सड़कों पर तेज गति से फर्राटा भरती गाड़ियां? छात्रावासों के कमरों में खटमल का आतंक। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए परिसर के आवारा कुत्तों का आतंक। बहुत कुछ है ऐसा जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को देश के अन्य शिक्षण संस्थानों से अब भी अलग नहीं होने देता।

जेएनयू के निरालेपन को बनाए रखने के लिए इन छोटे लगने वाले मुद्दों पर काम होना चाहिए। केवल कश्मीर की आजादी और भारत माता की जय से काम नहीं बनने वाला। कुछ विद्यार्थी संगठनों द्वारा जेएनयू पर हो रहे लगातार हमले का मुद्दा उठाने के बरक्स याद दिलाना चाहूंगा कि इस संस्थान पर हमारे भीतरी हमले भी कम नहीं हैं। इन छोटी-छोटी गलतियों से विश्वविद्यालय की तहजीब खोखली हुई जा रही है। आशा करता हूं कि यहां के विद्यार्थी संगठन बड़ी-बड़ी बातों के अलावे इन छोटे-छोटे मुद्दों को भी हल करने की बात करेंगे।
’अंकित दूबे, जेएनयू, नई दिल्ली

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First Published on November 21, 2016 3:24 am

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