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राजनीतिक दलों को समझना चाहिए कि सीमा पर गोलीबारी या आतंकी घुसपैठ केंद्र सरकार से पूछ कर नहीं की जाती

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में संघर्षविराम उल्लंघन और आतंकी घुसपैठ की घटनाएं केंद्र में बैठी मोदी सरकार के कारण हो रही हैं।
Author August 7, 2017 06:14 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

सुरक्षा और सियासत
एक तरफ भारतीय सेना और अर्द्धसैनिक बल मिल कर जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर वहां के अलगाववादी नेता बेतुकी बयानबाजी से जनता को सेना के प्रति भड़काते हैं। इससे जनता और सेना के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है और आतंकियों को घुसपैठ करने में मदद मिलती है। उधर विपक्ष में बैठे राजनीतिक दल ऐसी गंभीर परिस्थितियों में भी राजनीति करने से बाज नहीं आते। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में संघर्षविराम उल्लंघन और आतंकी घुसपैठ की घटनाएं केंद्र में बैठी मोदी सरकार के कारण हो रही हैं। लगता है, राहुल गांधी भूल रहे हैं कि देश में साठ वर्षों तक शासन करने का कीर्तिमान कांग्रेस के नाम रहा है और उसके शासनकाल में संघर्षविराम उल्लंघन और आतंकी गतिविधियां कुछ कम नहीं हुई थीं। राजनीतिक दलों को भलीभांति समझना चाहिए कि सीमा पर गोलीबारी या आतंकी घुसपैठ केंद्र बैठी सरकार से पूछ कर नहीं की जाती इसलिए जब बात देश की सुरक्षा की हो तो विपक्ष को केंद्र सरकार से सहयोग करने के साथ-साथ रणनीति बनाने में सुझाव भी देना चाहिए।
’दीपक सिंह नेगी, महिंद्रा पार्क, नई दिल्ली
मातृभाषा में शिक्षा
यह एक सुस्थापित तथ्य है कि मातृभाषा में दी गई शिक्षा अधिक सुग्राह्य और चिरस्थायी होती है और समय-समय पर शिक्षाशास्त्री इस बात पर जोर देते रहे हैं कि कम से कम प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में दी जानी चाहिए। लेकिन पता नहीं कि बाजार के दबाव में या अभिजात वर्ग के दबाव में उत्तराखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में प्रारंभिक कक्षाओं से ही शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी करने का फैसला किया है।
यह फैसला लागू कैसे होगा यह तो अलग विषय है। मुख्य बात है इसकी वांछनीयता। इस फैसले से स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ेगी क्योंकि जिनके घर पर कोई पढ़ाने वाला नहीं है या जो ट्यूशन नहीं ले सकते उनके लिए पास होना या अपनी पढ़ाई जारी रख पाना अत्यंत कठिन होगा। हो सकता है, सरकार यही चाहती हो। यदि सरकार चाहती है कि उत्तराखंड के छात्र शेष देश के छात्रों से अंग्रेजी ज्ञान में पीछे न रहें तो वह शुरू से ही अंग्रेजी की शिक्षा दे लेकिन माध्यम ही अंग्रेजी हो, इसमें बदनीयती छिपी है।
क्या कर्नाटक में हिंदी के लिए लड़ने वाले उत्तराखंड की सरकार से लड़ेंगे?
’आनंद मालवीय, नेहरू रोड, इलाहाबाद

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