January 18, 2017

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चौपाल: नापाक मंशा

आंख के बदले आंख फोड़ने का परिणाम गांधीजी के शब्दों में, अंतत: सभी को अंधा करना है।

Author October 14, 2016 04:39 am
प्रतिकात्मक पिक्चर।

जब तक भारत और पाकिस्तान के नेता फौज और अपने जंगी साजोसामान के बल पर एक-दूसरे को चेतावनी देते रहेंगे, तब तक दोनों देशों के बीच की समस्याओं का निपटारा मुश्किल है। आंख के बदले आंख फोड़ने का परिणाम गांधीजी के शब्दों में, अंतत: सभी को अंधा करना है। मजहब के आधार पर बना पाकिस्तान जब हिंदुस्तान को मिटाने की बात करता है तो उसके नेताओं का पाखंड साफ समझा जा सकता है। पाकिस्तान की आबादी जितने मुसलमान भारत में हैं और जब वह भारत को मिटाने की बात करता है तो भारतीय मुसलमानों को भी मिटाने की बात करता है। तब उसके लिए मजहब कोई मायने नहीं रखता।

आम पाकिस्तानियों को अपने रहनुमाओं के इस षड्यंत्र को समझना होगा कि मजहब उनके लिए सिर्फ सत्ता में बने रहने का एक जरिया है; इससे अधिक कुछ नहीं। जहां तक भारत का सवाल है, हमारा संविधान यह सुनिश्चित करता है कि भारत इसमें रहने वाले सभी धर्मों, पंथों आदि को मानने वालों का देश है। यही वजह है कि भारत में सर्वोच्च पदों पर किसी भी धर्म को मानने वाला इंसान पहुंच सकता है।
’सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, दिल्ली

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First Published on October 14, 2016 4:39 am

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