June 29, 2017

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जीएसटी से उम्मीद

भारत के कई अर्थशास्त्रियों ने जीएसटी का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने वाला कदम है।

Author June 19, 2017 05:31 am
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन में अब एक माह से भी कम का समय बचा है।

टॉपर घोटाला

बिहार का टॉपर्स घोटाले से पुराना नाता रहा है। वहां 2016 की बोर्ड परीक्षा में टॉपर घोटाले से किरकिरी होने के बावजूद इस वर्ष भी वही घोटाला हो गया। इससे राज्य की शिक्षा की असली तस्वीर उजागर हो गई है। पिछले साल फर्जी तरीके से टॉपर रही रूबी राय को लोग भूले भी नहीं थे कि अब 2017 के बिहार टॉपर गणेश कुमार की असलियत भी सबके सामने आ गई।गणेश को 500 में से 429 अंक मिले थे लेकिन जब उनसे विषय से संबंधित आसान सवाल पूछे गए तो जवाब देने में असमर्थ रहे। गणेश ने सिर्फ अंकों में फर्जीवाड़ा नहीं कराया बल्कि अपनी उम्र भी गलत तरीके से कम कराई। इस फर्जीवाड़े ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।न केवल गणेश बल्कि सवालों के घेरे में वे संस्थान भी हैं जहां से उसने फार्म भरा था। टॉपर्स घोटाले के बाद बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यह लगातार दूसरा साल है जब राज्य में इंटर आर्ट्स टॉपर में फर्जीवाड़े के कारण रिजल्ट रद्द किया गया हो। आखिर बिहार की शिक्षा व्यवस्था कब दुरुस्त हो जाएगी?
’शालिनी नेगी, जैतपुर, नई दिल्ली
जीएसटी से उम्मीद

मध्यप्रदेश सहित सभी राज्यों में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने वाला है। इसके विरोध में व्यापारी हड़ताल पर हैं। उनके अनुसार यह विरोध इस कर व्यवस्था की जटिलताओं और विसंगतियों के खिलाफ हो रहा है। दरअसल, जीएसटी के आने से सभी प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और व्यापारियों का विरोध इस बात की पुष्टि करेगा कि वे टैक्स से संबंधित विसंगतियों को बने रहने देना चाहते हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हमारी संघीय कर व्यवस्था काफी लचर थी जिसका फायदा ‘डिफाल्टर’ व्यापारियों को मिल रहा है। सामान्यत: यह विरोध प्रदर्शन उन्हीं की शह से हो रहा होगा।

भारत के कई अर्थशास्त्रियों ने जीएसटी का समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने वाला कदम है। सभी प्रदेश सरकारों ने इसका स्वागत करते हुए विधानसभाओं में बिल पारित भी कर दिया है। अपने निजी स्वार्थों से हट कर आज हमें सरकार की बनाई गई नई व्यवस्थाओं-सुधारात्मक कदमों पर भरोसा करने की जरूरत है ताकि हमारी गिनती भी विकसित देशों की जाए।
’धीरज चतुर्वेदी, सतना, मप्र

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First Published on June 19, 2017 5:30 am

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