December 05, 2016

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चौपाल: दोषी कौन

आठ नवंबर को अपने संदेश से प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को रात 12 बजे से महज कागज के टुकड़े बना दिया।

Author November 16, 2016 01:15 am
एटीएम के सामने खड़ी लंबी कतार। (Representative Image)

मोदी सरकार भ्रामक प्रचार के जरिए जनता को गुमराह करने के लिए नित नई शाब्दिक जुगालियां करती रहती है जबकि उसकी कार्रवाइयों का जमीनी नतीजा न बराबर सामने आता है। वह पहले लुभावना नारा देती है, जनता से वादा करती है और जब निभाने का दबाव बनाया जाता है तो उसे जुमला बता कर पतली गली से खिसकने के लिए कोई और ही नई नौटंकी रच लेती है। सीमापार के घुसपैठियों, आतंकियों को सबक सिखाने के बतौर बहुप्रचारित ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का आज असर क्या है? सीमापार से वही आतंकी घुसपैठ, वही गोलीबारी सतत जारी है। इसमें जहां पहले सैनिक शहीद हो रहे थे वहां अब उनके साथ सीमाई गांवों के नागरिक भी जान गंवा रहे हैं। इसी तरह बिना सोचे-विचारे खुद को कुछ अलग तरह का प्रधानमंत्री जताने की भूख में आनन-फानन किए गए 500 और 1000 के नोटों के विमुद्रीकरण का निशाना आखिर कौन बन रहा है? इस बहुप्रचारित ‘मोदी मास्टर स्ट्रोक’ से न आतंकी मरे, न घुसपैठिये मरे, न उनका सरगना मरा और न ही मरा ‘कालामीर’…! इससे तो वही ‘आमजन’ मरा जो पहले ही अभावों का मारा है और रोजी-रोटी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है।

आठ नवंबर को अपने संदेश से प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को रात 12 बजे से महज कागज के टुकड़े बना दिया। इससे अपनी खून-पसीने से कमाई और जमा राशि की निकासी के लिए आमजन बैंकों की लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होने पर मजबूर हो गए। विमुद्रीकरण की ऐसी सजा शायद ही किसी देश के नागरिकों को भुगतनी पड़ी हो। अनेक जगह दिनभर खड़े रह कर भी लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। ज्यों-ज्यों दिन गुजरते गए यह कथित ‘चमत्कारिक धमाका’ जनता के लिए असहनीय मजाक बनता हुआ सामने आया। जैसी घोषणाएं की गर्इं, वैसे इंतजाम नहीं हुए। न एटीएम मशीनों के नोट बाक्स में बदलाव हुए और न सॉफ्टवेयर बना। चेन्नई में लाइन में खड़े एक बुजुर्ग की मौत हो गई, वहीं नोएडा के अस्पताल में भर्ती एक मासूम की दवा के लिए रुपए न होने के चलते मौत हो गई। हर आने वाले दिन लाइन में खड़े लोगों की मौतों की खबरें सरकार के लिए सामान्य बन गर्इं।

इससे जनता का धीरज जवाब देने लगा। पहले जो लोग थोड़ी तकलीफ और असुविधा सहने के उपदेश दे रहे थे, जब उन पर आई तो वे भी बिलबिला उठे और झुंझलाने लगे। पीड़ित जनता की खीझ और नाराजगी निरंतर बढ़ती गई। तेरह नवंबर को सरकार ने समीक्षा कर एटीएम से 2500 रुपए रोज निकालने की अनुमति दी पर एटीएम काम करेंगे तब तो रकम निकलेगी! सोशल मीडिया पर आती खबरें भी सरकार की गोपनीयता की पोल खोल रही हैं कि किस तरह उसके चहेतों ने अपनी रकम को ठिकाने लगाने और नए नोट हासिल करने के इंतजाम कर लिए थे। मरने के लिए आमजन जो है! कहां गई इनकी देशभक्ति! लाइन में खड़े-खड़े जान गंवाने वाले लोगों की मौतों के लिए कौन दोषी है?
’रामचंद्र्र शर्मा, तरुछाया नगर, जयपुर

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First Published on November 16, 2016 1:15 am

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