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चौपाल: खतरे की फसल

आजकल जेनेटिकली मॉडिफाइड जैव संवर्धित सरसों बहुत चर्चा में है।
Author October 26, 2016 05:17 am
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सरकार से 17 अक्‍टूबर तक जीएम सरसों न जारी करने के लिए कहा है।

आजकल जेनेटिकली मॉडिफाइड जैव संवर्धित सरसों बहुत चर्चा में है। केंद्र सरकार इस सरसों को बाजार में उतारना चाहती है, पर कई राज्य सरकारें इसके विरोध में उतर आई हैं जो जायज भी है। ये मॉडिफाइड किस्म के फसल तरह-तरह के खरपतवार को अपने साथ लाएंगे, जिससे बचने के लिए एक खास किस्म का रसायन खेतों में डालना पड़ेगा। इससे हमारे स्वास्थ्य के अलावा जमीन पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, किसान भी इस दवाई के लिए कंपनियों पर निर्भर हो जाएंगे।

भारत एक जैविक विविधता वाला देश है, जहां सभी फसलों की उन्नत किस्में मौजूद हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसी उन्नत किस्मों और जैविक खेती को बढ़ावा दे जो हमारी जलवायु के अनुकूल हैं। जेनेटिकली मॉडिफाइड किस्में देश में मौजूद उन्नत किस्मों के लिए भी एक बड़ा खतरा हैं। विदेशी कंपनियों के फायदे के लिए लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो, ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
’अश्वनी राघव, उत्तमनगर, नई दिल्ली

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