April 30, 2017

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किसानों की खातिर, कचरा प्रबंधन

राजनीतिक पार्टियों ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर जो असंवेदनशीलता दिखाई है उससे सरकार की विश्वसनीयता में कमी आई है।

Author April 10, 2017 05:15 am
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

किसानों की खातिर
जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन कर रहे तमिलनाडु के किसानों की समस्याओं पर पिछले दिनों संसद में चर्चा हुई और सम्मानित सदस्यों ने धरने पर बैठे किसानों के प्रति अपनी सहानुभूति भी दिखाई। लेकिन कोरी सहानुभूति से कुछ होने वाला नहीं है, जमीन पर कदम उठाए जाने की जरूरत है। आज राजनीतिक पार्टियों ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर जो असंवेदनशीलता दिखाई है उससे सरकार की विश्वसनीयता में कमी आई है। चुनावों के समय किसानों के कर्ज माफ करने के बड़े-बड़े प्रलोभन दिए जाते हैं और सत्ता में आते ही सरकारें अपने वायदे से मुकर जाती हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी कर्ज माफी का वायदा करने के बावजूद सरकार बनते ही अरुण जेटली ने किसानों की कर्ज माफी में केंद्र सरकार की असमर्थता जता दी। वातानुकूलित कमरों में बैठकर किसानों की चिंता का दिखावा करने वाले देश के कर्णधारों को किसानों की समस्याओं के बारे में पता भी है या नहीं, यह शंका भी सौ फीसद सही है। जमीनी हकीकत से रूबरू हुए बिना इनसे कोई हल निकालने की उम्मीद करना भी बेमानी है।
’अश्वनी राघव, उत्तम नगर, नई दिल्ली
कचरा प्रबंधन
आज भारत के सामने ठोस कचरे का निपटान एक बड़ी चुनौती है। इन दिनों देश के शहरों से हर वर्ष 62 लाख टन कचरा निकलता है जिसमें 5.6 लाख टन प्लास्टिक कचरा, 15 लाख टन ई-कचरा, 7 लाख टन खतरनाक औद्योगिक कचरा और 0.5 लाख टन मेडिकल कचरा है। इसके अलावा 75 फीसद सीवेज का भी सही ढंग से निपटारा नहीं हो रहा है। हमारे नगरों-महानगरों के चारों ओर कचरे के ढेर ही ढेर नजर आते हैं। बात देश की राजधानी दिल्ली की करें तो यहां बारह बड़े कचरे के ढेर तो सात मंजिला इमारतों से भी ऊंचे हैं। यही हाल मुंबई का है। इस शहर में एक लाख टन कचरा यों ही खुले में पड़ा है। कचरे के ढेरों के पास झोपड़-पट्टियों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। इनके आसपास रहने वाले लोगों को गंभीर बीमारियों जैसे मलेरिया, टीबी, अस्थमा व चर्म रोगों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा कचरे से निकलने वाले खतरनाक रसायनों से जल,भूमि व वायु प्रदूषित हो रही है।

आज ठोस कचरे का बेहतर प्रबंधन समय की मांग है। इसके लिए कई उपाय किए जाने चाहिए। जैसे शहर की खाली पड़ी जमीन पर कूड़ा डालने से रोकना, सार्वजनिक जगहों पर जहां-तहां कूड़ा फैलाने वाले व्यक्ति को आर्थिक दंड देना, जो नगर निगम समय पर कूड़ा-कचरा न उठाएं उन पर ठोस कार्रवाई करना और कचरे के पुनर्शोधन संयंत्रों की संख्या बढ़ाना आदि।
अगर स्वच्छ भारत के सपने को साकार करना है तो यह काम अकेले सरकारी स्तर पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए आम जनता को भी बढ़-चढ़ कर अपनी भूमिका निभानी होगी तब जाकर साफ-सुथरे और गंदगी मुक्त भारत की कल्पना साकार की जा सकेगी।
’कैलाश बिश्नोई, मुखर्जी नगर, नई दिल्ली

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First Published on April 10, 2017 5:15 am

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