December 09, 2016

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में सत्तर हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

Author November 17, 2016 02:12 am
(चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में सत्तर हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इन आत्महत्याओं के कारणों में खेती से जुड़ी तमाम समस्याओं सहित कर्ज न चुका पाना अहम है । महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ किसानों की आत्महत्या के मामले में अव्वल दर्जे पर हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार हर रोज 2.5 हजार किसान खेती छोड़ रहे हैं। 2007 से 2012 के बीच, करीब 3.2 करोड़ गांवों के किसान, अपना घर, जमीन बेच कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। खेती के प्रति लोगों का रुझान कम होने का कारण पंचायतों का वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर नहीं होना है। गांव के संसाधन को विकसित करने के लिए केंद्रीय बजट का सात फीसद गांवों को दिया जाना समय की मांग है। तभी किसानों की आत्महत्याओं पर रोक लगेगी और कृषि विकास में वृद्धि से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी।
’विनीता मंडल, इलाहबाद

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First Published on November 17, 2016 2:12 am

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