December 07, 2016

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चौपाल: गुणवत्ता की शिक्षा

शिक्षा किसी भी समाज की बुनियाद होती है। बेहतर शिक्षा बेहतर समाज का निर्माण करती है।

Author नई दिल्ली | November 2, 2016 05:28 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

शिक्षा किसी भी समाज की बुनियाद होती है। बेहतर शिक्षा बेहतर समाज का निर्माण करती है। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता जीवन में सफलता की संभावनाओं पर सबसे गहरा प्रभाव डालती है। दिल्ली सरकार ने जब ‘पैरेंट टीचर मीटिंग’ रखी, तो उसका समाज के सभी वर्गों द्वारा स्वागत किया गया। अभिभावकों में भी इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। अभिभावकों का यह कहना कि ‘वे अपने बच्चों की प्रगति को समझ सके और रुकावटों को पहचान सके’, इस पहल के महत्त्व को उजागर करने के लिए काफी है।

अभिभावकों का दबाव, दुष्प्रचार का डर या जागरूकता कहें, कई स्कूल अपने बुनियादी ढांचे को लेकर भी सजग दिखे और उसमें सुधर किया। कुल मिला कर यह पहल सकारात्मक साबित हुई। भारतीय समाज शिक्षा के महत्त्व को पहचानते हुए भी शिक्षा के संकट का सामना कर रहा है, जो मूलत: दो प्रकार का है- पहला, शिक्षा की बढती कीमत, दूसरा, शिक्षा की घटती गुणवत्ता।

इन कारणों से अच्छी शिक्षा आम जन की पहुंच से दूर होती जा रही है। भारत में व्यापक गरीबी इस संकट को और गहरा बना देती है। इसी व्यापक गरीबी के चलते शिक्षा के सार्वजनिक महत्त्व यानी सरकारी स्कूलों की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन दशकों का अनुभव यह कहता है कि ये स्कूल गुणवत्ता के पायदान पर कहीं नीचे सरकते जा रहे हैं। ‘असर’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की स्थिति दयनीय है। जरूरत इनकी दशा और दिशा सुधारने की है। इस दिशा में दिल्ली सरकार ने एक पहल की है। देखना है कि आगे इसका क्या स्वरूप रहता है।
’मणि हर्ष दुबे, नई दिल्ली

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First Published on November 2, 2016 5:28 am

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