April 30, 2017

ताज़ा खबर

 

उदास होते शहर

मनमाफिक रोजगार या आशानुरूप सफलता न मिलना, लंबे समय का तनाव, बीमारी, शारीरिक बदलाव भी डिप्रेशन के कारण हो सकते हैं।

Author April 12, 2017 05:40 am
बच्चों के डिप्रेशन में मददगार है म्यूजिक थेरेपी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मानसिक रोगों खासकर अवसाद की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई है और लोगों को मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया है। अवसाद की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल विश्व में लगभग आठ लाख लोग इसके कारण आत्महत्या कर लेते हैं। एक अनुमान के अनुसार हर पैंतालीस सेकेंड में अवसाद के एक रोगी की मृत्यु हो जाती है। आत्महत्या के लगभग दो तिहाई मामलों के पीछे अवसाद होता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार पिछले दस सालों में भारत में भी अवसाद के रोगियों में लगभग बीस प्रतिशत का इजाफा हुआ है जो गंभीर चिंता का विषय है।

अक्सर हम डिप्रेशन को उदासी समझ लेते हैं जबकि इनमें बहुत अंतर है। उदासी एक सामान्य प्रकिया है जिसका अनुभव सबको होता है और यह थोड़े समय के लिए होता है। अवसाद एक मानसिक समस्या है जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक उदास रहता है और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ता है। इसके अन्य लक्षणों में चिड़चिड़ापन, खालीपन महसूस होना, अपराधी होने की भावना का घर कर जाना, कोई काम करने का मन न करना, मन का केंद्रित न हो पाना, निराशावादी हो जाना, नींद न आना, भूख न लगना, थकावट, आत्महत्या करने का मन होना आदि हैं। मनमाफिक रोजगार या आशानुरूप सफलता न मिलना, लंबे समय का तनाव, बीमारी, शारीरिक बदलाव भी डिप्रेशन के कारण हो सकते हैं। हार्मोनल असंतुलन भी इसकी एक बड़ी वजह है। महिलाओं को प्रसव के बाद अवसाद की शिकार होते देखा गया है। बच्चे, किशोर, वयस्क, वृद्ध सभी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
डिप्रेशन का इलाज संभव है पर जागरूकता की कमी के चलते लोग इसे बीमारी नहीं समझते और चिकित्सकीय सलाह लेने में हिचकते हैं। उपचार की कमी के चलते रोग बढ़ता जाता है और रोगी और परिवारजन ताउम्र परेशान होते रहते हैं। अधिकतर मामलों में देखभाल करने वाले भी अवसाद का शिकार हो जाते हैं। हाल ही में एक खबर छपी थी जिसमें अवसादग्रस्त एक वृद्ध-दंपति ने खुद को महीनों एक कमरे में बंद कर लिया था और जब उन्हें बाहर निकाला गया तो उनकी हालत बहुत नाजुक थी। ऐसी घटनाएं आजकल आम हैं। अगर आपको अपने या किसी अन्य के व्यवहार में अचानक कोई बदलाव महसूस होता है, रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे नहाने, बिस्तर से उठने आदि में भी आलस आता है, लोगों से कटने लगे हैं, आत्महत्या करने की बात सोचते रहते हैं, भूख नहीं लगती, अपराधबोध लगता है तो तुरंत अपने विश्वसनीय मित्र से बात करें और विशेषज्ञ की सलाह लें। समय से शुरू किए उपचार से अवसाद पर नियंत्रण संभव है।

अवसाद के मरीजों के उपचार में परिवार और समाज की बहुत जिम्मेदारी होती है। परिवार से मिल रहा भावनात्मक सहयोग और सम्मान पीड़ित को बीमारी से लड़ने में सहायता करता है। समाज का भी दायित्व है कि मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के साथ भेदभाव न करे और समझे कि हर मानसिक रोगी पागल नहीं होता। कुछ दिन पहले लोकसभा में ‘मानसिक स्वास्थ्य सेवा विधेयक-2016’ पारित हुआ जो मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों को सुरक्षा और उपचार का अधिकार देता है। हम सभी का कर्तव्य है कि एक-दूसरे से मानसिक रोगों के बारे में बात करें और लोगों की गलतफहमियों को दूर करें। मानसिक रोगों का इलाज संभव है, जरूरत है बस अपनी जिम्मेदारी समझने और जागरूक रहने की।
’अश्वनी राघव, उत्तम नगर, नई दिल्ली

 

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जारी हुआ जमानती वारंट; पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर की थी टिप्पणी

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on April 12, 2017 5:40 am

  1. No Comments.

सबरंग