December 11, 2016

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धुंध में उम्मीद

केंद्र सरकार की नोटबंदी के फैसले के बाद से पूरा देश दो धड़ों में बंट गया है।

Author November 30, 2016 02:24 am
हजार रुपए के नोट।

केंद्र सरकार की नोटबंदी के फैसले के बाद से पूरा देश दो धड़ों में बंट गया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकार के इस अचानक फैसले से लोगों को परेशानी हुई है। अब तक कई लोगों की इससे जान भी जा चुकी है। सरकार का यह फैसला सही है या गलत, यह तो आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन वर्तमान में लोगों को जो परेशानियां हो रही हैं, उससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।

नोटबंदी के बाद से लोगों की जिंदगी अचानक ठहर-सी गई है। लोग पैसे के लिए बैंक और एटीएम के चक्कर लगा रहे हैं। इससे बाजार, व्यवसाय और उद्योग-धंधा पूरी तरह से चौपट हो गया है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि सरकार ने जिस तरह से यह फैसला लिया, उस तरह से उसकी तैयारी नहीं थी। एटीएम और बैंक आज भी नकदी की किल्लत से जूझ रहे हैं। जब सरकार के बताए स्थानों पर ही लोगों को नए नोट और खुले पैसे नहीं मिल रहे हैं तो यह तैयारी कैसे पूर्व नियोजित कही जा सकती है।

सरकारी तंत्र भी इस पर एकमत नहीं है कि लोगों की समस्याएं आखिर कितनी दिन और रहेंगी। प्रधानमंत्री देश के लोगों से पचास दिन मांगते हैं और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया कहते हैं कि इससे उबरने में तीन महीने का वक्त लग सकता है। वित्त मंत्रालय का बयान भी कुछ अलग है। वहीं आरबीआई ने अभी तक इस फैसले के बाद कुछ नहीं बोला है, जिस पर भरोसा कर लोग सब कुछ जल्द ठीक होने की उम्मीद कर सकें।
’मो सद्दाम, हजरत निजामुद्दीन, दिल्ली

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First Published on November 30, 2016 2:24 am

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