December 06, 2016

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बचपन में नवरात्रि के दिन से ही हम बच्चों की दिवाली शुरू हो जाती थी, क्योंकि नवरात्रि से घरों की सजावट होने लगती थी।

Author October 27, 2016 05:50 am
इस साल 30 अक्टूबर, रविवार को दिवाली मनाई जाएगी।

बचपन में नवरात्रि के दिन से ही हम बच्चों की दिवाली शुरू हो जाती थी, क्योंकि नवरात्रि से घरों की सजावट होने लगती थी। इसके साथ दशहरे से ही आतिशबाजी कि गूंज हवाओं में सुनाई देने और घर से लेकर सड़क तक रंग-बिरंगी लाइटों की झड़ियां जगमगाने लगती हैं। पिछले कुछ दिनों से कुछ लोगों की ओर से चीन में बने सामानों को ‘नो’ यानी नहीं कहने की बात जोर पकड़ रही है। जो ऐसा नहीं करता है, उसे देशद्रोही करार दिया जा रहा है। लेकिन क्या ऐसा मुमकिन है कि हम पूरी तरह से चीनी सामानों का पूरी तरह से तिरस्कार कर पाएं, जबकि चीन के सामान की आदत हमारे अंदर ‘चीनी’ कि तरह घुली हुई है। आज हर जगह चीन में बनी हुई चीजें फैली हुई हैं- इलेक्ट्रॉनिक सामान,घरेलू चीजें, खिलौने और अन्य वस्तुओं से लेकर खाने-पीने के सामान तक पर इनकी छाप है।

चीनी सामान अन्य उत्पादों के मुकाबले काफी किफायती होते हैं। इसलिए छोटे से लेकर बड़े दुकानदार तक इन सामानों की अधिक खरीदारी करते हैं। सस्ता होने की वजह से ग्राहकों में इसकी अधिक मांग होती है। खासतौर पर त्योहारों के मौसम में चीनी सामानों की बिक्री बढ़ जाती है, इसलिए ज्यादातर दुकानदार त्योहार आने से पहले ही सामान खरीद लाते हैं।

ऐसे में चीनी सामानों पर प्रतिबंध की मांग करने वाले देशभक्तों को एक बार विचार करना होगा कि वे चीनी सामानों का विरोध करते हुए क्या छोटे पैमाने का व्यवसाय करने वालों की रोजी-रोटी छीन लेना चाहते हैं? लोग अब चाहें भी तो चीन के सामान लाने से मना नहीं कर पाएंगे। ऐसे में त्योहर के समय में अपने ही देश के लोगों का त्योहार फीका करना क्या जायज होगा? जबकि चीन का माल तो उसी दिन देशी हो चुका, जब हमारे व्यापारियों ने इन सामानों को खरीद कर अपनी दुकानों में बेचने के लिए रख लिया। विरोध की जो चिंताजनक बयार चल रही है, उसमें अब हम चीन का नहीं, बल्कि उन तमाम छोटे दुकानदारों का तिरस्कार करेंगे जो इन चीजों से अपनी दिवाली मनाने वाले थे।
’विनीता मंडल, आइआइएमसी, दिल्ली

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First Published on October 27, 2016 5:50 am

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