March 26, 2017

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चौपाल: कर्ज का मर्ज

कर्जमाफी से किसानों को राहत मिलेगी, महज एक भ्रम है। इससे बड़े और छोटे किसानों के बीच असमानता की गहरी खाई खुद जाती है।

Author October 8, 2016 05:25 am
खेत में किसान (फाइल फोटो)

यह सोचना कि कर्जमाफी से किसानों को राहत मिलेगी, महज एक भ्रम है। इससे बड़े और छोटे किसानों के बीच असमानता की गहरी खाई खुद जाती है। एनएसएसओ(नेशनल सेंपल सर्वे आॅर्गनाइजेशन) की 2014 की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्रोत से कुल कर्ज में 80 फीसद कर्ज बड़े किसानों ने लिया जबकि मात्र 15 फीसद छोटे किसानों को कर्ज मिल पाया। जाहिर है, ऋण माफी से बड़े किसानों की झोली भरेगी। सोचिए, अगर कर्ज माफी से किसानों को फायदा मिलता तो महाराष्ट्र के किसान आत्महत्या क्यों करते?  रिपोर्ट यह भी कहती है कि धान उगाने वाले 95 फीसद और गन्ना उगाने वाले 99 फीसज किसान बीमा नहीं कराते। हमें सबसे पहले मुख्य समस्या मसलन- बीमा के सीमित क्षेत्र, संग्रहण व्यवस्था की कमी, एपीएमसी कानून, कोल्ड स्टोरेज, उन्नत बीजों की कमी और सस्ते ऋण की सुविधाओं का अभाव जैसी समस्याओं को तेजी से हल करना चाहिए।

इसके अलावा कर्ज देने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए। यह इतनी आसान हो कि कर्ज देने की प्रक्रिया में तेजी आए, कर्ज निश्चित समय पर मंजूर हो और सीधा जरूरतमंद के हाथों में पहुंचे। इसके लिए हमें सलाना कर्ज योजना को नाबार्ड के साथ मिल कर तैयार करना चाहिए। ऐसा करने से हम किसानों की पूंजी की कमी पूरी कर पाएंगे जिससे सरकार द्वारा किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा और किसानों के चेहरे पर हम स्थायी मुस्कान भी देख सकते हैं।
’नीतीश कुमार बेगूसराय, बिहार

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First Published on October 8, 2016 5:25 am

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